अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप

रायपुर: अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अपर कलेक्टर अंकिता सोम पर 5 लाख रुपये लेकर सरकारी नहर की जमीन का कमर्शियल डायवर्जन करने का आरोप लगा है। यह मामला सीएम सचिवालय तक पहुंच गया है और इस पर जांच की मांग की गई है। अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
- अपर कलेक्टर पर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
- 5 लाख रुपये में नहर की जमीन का हुआ कमर्शियल डायवर्जन
- कोरिया जिले की सरकारी जमीन पर व्यवसायिक निर्माण का मामला
- अंकिता सोम पर गंभीर आरोप, जांच की मांग
- सीएम सचिवालय तक पहुंची डायवर्जन घोटाले की शिकायत
30 साल पहले अधिग्रहित जमीन का कमर्शियल डायवर्जन
करीब 30 साल पहले एक किसान ने नहर परियोजना के लिए अपनी जमीन सरकार को दे दी थी और इसके बदले में मुआवजा भी ले लिया था। सरकार ने इस जमीन का अधिग्रहण कर लिया था, लेकिन अब उसी जमीन का डायवर्जन व्यावसायिक निर्माण के लिए करा लिया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह काम 5 लाख रुपये की रिश्वत देकर करवाया गया।अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
शिकायत और जांच की स्थिति
यह शिकायत सिकंदर खान नाम के व्यक्ति ने की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि तत्कालीन एसडीएम और वर्तमान में अपर कलेक्टर अंकिता सोम ने 5 लाख रुपये की रिश्वत लेकर जमीन का डायवर्जन किया। इस मामले की जांच में कई दस्तावेज सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि यह जमीन नहर परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी।अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
कैसे हुआ डायवर्जन?
शिकायत के अनुसार, कोरिया जिले की बैकुंठपुर तहसील के ग्राम कंचनपुर में स्थित खसरा नंबर 331/2 की जमीन का डायवर्जन कराया गया। यह जमीन कलावती नाम की महिला की थी, जिसने व्यावसायिक निर्माण के लिए इसका डायवर्जन कराया। हालांकि, इस जमीन का अधिग्रहण 1993 में मेज नहर परियोजना के लिए किया गया था और मुआवजा भी दिया गया था।अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
नियमों की अनदेखी
डायवर्जन में तीन मुख्य बिंदुओं पर नियमों की अनदेखी की गई है:
- ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं लिया गया, बल्कि सीधे सरपंच से बिना डिस्पैच नंबर के प्रमाण पत्र लिया गया।
- PWD से मिली NOC में भी पूरी तरह अनापत्ति नहीं दी गई थी।
- राजस्व निरीक्षक ने जमीन पर अपना प्रतिवेदन दिया, बावजूद इसके डायवर्जन को मंजूरी दी गई।
सीएम सचिवालय तक पहुंची शिकायत
यह मामला अब सीएम और मुख्य सचिव तक पहुंच गया है। शिकायत में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि इस जांच में सारे तथ्य सामने आ जाएंगे और यह स्पष्ट हो जाएगा कि मेज परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन का डायवर्जन मोटे लेन-देन से कराया गया है।अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
अपर कलेक्टर का पक्ष
जब इस मामले पर अंकिता सोम से बात की गई तो उन्होंने आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि उन्होंने कोई डायवर्जन नहीं किया और 5 लाख रुपये लेने के आरोप भी गलत हैं। अंकिता सोम ने कहा कि इस मामले में पहले भी जांच टीम गठित की गई थी, लेकिन उस टीम ने उनका पक्ष नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई जांच हो रही है तो उसे निष्पक्ष रूप से पूरा किया जाना चाहिए।अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप
निर्माण कार्य पर प्रशासन की कार्रवाई
शिकायत के बाद, प्रशासन ने उस जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को अवैध घोषित कर दिया और वहां के पिलर तोड़ दिए हैं। साथ ही निर्माणकर्ता को नोटिस भी जारी किया गया है।अपर कलेक्टर पर 5 लाख रुपये लेकर नहर की जमीन का डायवर्जन कराने का आरोप.
यह मामला एक बार फिर सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि इस शिकायत पर किस तरह की कार्रवाई होती है और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।



















