LIVE UPDATE
भारत

अब ‘अंधा’ नहीं है कानून, न्याय की देवी का नया रूप : जानें कैसे बदली गई मूर्ति की परंपरा

नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका ने नए युग में कदम रखते हुए न्याय की देवी (Goddess of Justice) की मूर्ति के प्रतीक को बदल दिया है। अब, न्याय की देवी की आंखों से पट्टी हटा दी गई है और हाथ में तलवार की जगह संविधान को थमा दिया गया है। इस बदलाव की पहल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ ने की, जिनका मानना है कि तलवार हिंसा का प्रतीक है, जबकि संविधान से न्याय की वास्तविकता सामने आती है। अब ‘अंधा’ नहीं है कानून, न्याय की देवी का नया रूप : जानें कैसे बदली गई मूर्ति की परंपरा

कैसे हुई न्याय की देवी के स्वरूप में बदलाव की शुरुआत?

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ का कहना है कि न्याय सबके लिए समान होना चाहिए और कानून अंधा नहीं होता। न्याय की देवी का परंपरागत रूप, जिसमें आंखों पर पट्टी बंधी होती थी, अब बदल दिया गया है। इस नई मूर्ति का पहला रूप सुप्रीम कोर्ट की जजों की लाइब्रेरी में लगाया गया है। अब ‘अंधा’ नहीं है कानून, न्याय की देवी का नया रूप : जानें कैसे बदली गई मूर्ति की परंपरा

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

संविधान के हाथ में आने से क्या संदेश मिला?

न्याय की देवी के हाथ में तलवार की जगह संविधान को रखा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय न्यायालय संविधान के अनुसार काम करते हैं, न कि हिंसा के आधार पर। दूसरे हाथ में तराजू को बरकरार रखा गया है, जो न्याय की समानता का प्रतीक है। अब ‘अंधा’ नहीं है कानून, न्याय की देवी का नया रूप : जानें कैसे बदली गई मूर्ति की परंपरा

कहां से भारत में आई न्याय की देवी की मूर्ति?

न्याय की देवी की उत्पत्ति यूनान की प्राचीन परंपराओं से हुई है, जहां इसे ‘जस्टिया’ कहा जाता था। ब्रिटिश काल में यह मूर्ति भारत आई और हमारे न्यायालयों का हिस्सा बनी। परंपरागत रूप से, मूर्ति की आंखों पर पट्टी निष्पक्षता का प्रतीक थी, जो अब बदलकर नए भारत में न्याय की नई तस्वीर पेश कर रही है। अब ‘अंधा’ नहीं है कानून, न्याय की देवी का नया रूप : जानें कैसे बदली गई मूर्ति की परंपरा

CJI चंद्रचूड़ के विचार और बदलते न्यायालय की तस्वीर

CJI का मानना है कि भारत को अब अंग्रेजी विरासत से आगे बढ़ना चाहिए और एक आधुनिक न्यायिक व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए। यही कारण है कि उन्होंने इस नई मूर्ति का सुझाव दिया, जिसमें अब तलवार के स्थान पर संविधान दिखाई देता है। अब ‘अंधा’ नहीं है कानून, न्याय की देवी का नया रूप : जानें कैसे बदली गई मूर्ति की परंपरा

 

Nidar Chhattisgarh Desk

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है। इसकी प्रतिबद्ध ऑनलाइन संपादकीय टीम हर रोज विशेष और विस्तृत कंटेंट देती है। हमारी यह साइट 24 घंटे अपडेट होती है, जिससे हर बड़ी घटना तत्काल पाठकों तक पहुंच सके। पाठक भी अपनी रचनाये या आस-पास घटित घटनाये अथवा अन्य प्रकाशन योग्य सामग्री ईमेल पर भेज सकते है, जिन्हें तत्काल प्रकाशित किया जायेगा !

Related Articles

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE