थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

मामला: सुभाष अठारे बनाम महाराष्ट्र राज्य (आपराधिक आवेदन 3421/2022)
बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने 23 सितंबर, 2024 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस स्टेशन में की गई वीडियो रिकॉर्डिंग को “जासूसी” के दायरे में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने “ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923” की धारा 3 के तहत पुलिस स्टेशन को “प्रतिबंधित स्थान” मानने से इनकार कर दिया। थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
मामले का विवरण
यह मामला अहमदनगर जिले के पाथर्डी पुलिस स्टेशन से जुड़ा है, जहां सुभाष और संतोष अठारे ने अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
1. घटना की पृष्ठभूमि
- दिनांक: 21 अप्रैल 2022
- घटना: तीन अज्ञात व्यक्तियों ने सुभाष और संतोष अठारे के घर में जबरन प्रवेश कर उनकी मां के साथ दुर्व्यवहार किया।
- शिकायत: इस घटना के बाद सुभाष ने पाथर्डी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
2. पुलिस कार्रवाई पर सवाल
- पुलिस ने केवल एक गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) शिकायत दर्ज की।
- जब सुभाष ने पुलिस से संज्ञेय अपराध दर्ज न करने पर सवाल उठाया, तो पुलिस ने उन्हें धमकाया।
3. वीडियो रिकॉर्डिंग का मामला
- सुभाष ने पुलिस स्टेशन में पुलिस अधिकारी के साथ हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया।
- इसके बाद, पुलिस ने उनके खिलाफ “ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923” की धारा 3 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 506 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी।
4. हाई कोर्ट में याचिका
सुभाष और संतोष अठारे ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को रद्द करने की मांग की। थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश
1. पुलिस स्टेशन प्रतिबंधित स्थान नहीं:
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट” की धारा 2(8) के तहत पुलिस स्टेशन को “प्रतिबंधित स्थान” की परिभाषा में नहीं रखा जा सकता।
2. जासूसी की परिभाषा पर पुनर्विचार:
कोर्ट ने कहा कि जासूसी का मतलब ऐसी सूचना एकत्र करना है, जो राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक हो। पुलिस स्टेशन में रिकॉर्डिंग इन शर्तों को पूरा नहीं करती।
3. एफआईआर का आंशिक रद्दीकरण:
- “ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923” के तहत आरोप रद्द कर दिए गए।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत जांच जारी रहेगी। थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
निर्णय का महत्व और प्रभाव
1. नागरिक अधिकारों की रक्षा:
यह निर्णय आम नागरिकों को उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए सशक्त बनाता है।
2. पुलिस की जवाबदेही:
पुलिस स्टेशन में रिकॉर्डिंग को जासूसी न मानने से पुलिस अधिकारियों पर अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने का दबाव बढ़ेगा।
3. गोपनीयता अधिनियम के दुरुपयोग पर रोक:
यह फैसला “ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट” के दुरुपयोग को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
फैसले की तारीख और न्यायाधीशों का विवरण
- फैसले की तारीख: 23 सितंबर, 2024
- न्यायमूर्ति: श्रीमती विभा कंकनवाड़ी और एस.जी. चपलगांवकर थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग जासूसी नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला



















