150 वर्षों से होली नहीं मना रहा यह गांव, न जलती होलिका, न उड़ता गुलाल!

कोरबा का अनोखा गांव, जहां 150 साल से नहीं मनी होली
कोरबा। होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां बीते 150 वर्षों से होली नहीं मनाई गई। यह गांव है खरहरी, जो जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित है।
गांव में न तो होलिका दहन होता है, न ही गुलाल उड़ता है। यहां के बुजुर्गों का मानना है कि अगर गांव में होली मनाई गई, तो कोई अनहोनी हो सकती है। 150 वर्षों से होली नहीं मना रहा यह गांव, न जलती होलिका, न उड़ता गुलाल!
150 साल पुरानी मान्यता, क्यों नहीं मनती होली?
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब 150 साल पहले गांव में होली के दिन भीषण आग लग गई थी, जिससे पूरा गांव जलकर खाक हो गया। यह घटना होलिका दहन के तुरंत बाद घटी थी। लोगों का मानना है कि आग आसमान से गिरे अंगारों की वजह से लगी थी, जो बैगा (गांव के पुजारी) के घर पर गिरी और फिर पूरी बस्ती जल गई।
तब से लेकर आज तक गांव में कोई भी व्यक्ति होली नहीं मनाता। 150 वर्षों से होली नहीं मना रहा यह गांव, न जलती होलिका, न उड़ता गुलाल!
क्या देवी मड़वारानी का श्राप है इसकी वजह?
गांव में एक दूसरी मान्यता भी प्रचलित है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि देवी मड़वारानी ने सपने में आदेश दिया था कि इस गांव में होली न मनाई जाए। यदि किसी ने होली खेली, तो गांव पर भयंकर आपदा आ सकती है।
इस मान्यता के चलते गांव की नई पीढ़ी भी इस परंपरा को निभा रही है। यहां तक कि गांव की महिलाएं, जो शादी से पहले अपने मायके में होली खेलती थीं, खरहरी में आकर रंगों से दूरी बना लेती हैं। 150 वर्षों से होली नहीं मना रहा यह गांव, न जलती होलिका, न उड़ता गुलाल!
गांव में 76% साक्षरता दर, फिर भी क्यों जारी है परंपरा?
खरहरी गांव की साक्षरता दर 76% है, यानी यहां के लोग शिक्षित हैं। लेकिन इसके बावजूद वे इस परंपरा को टूटने नहीं देना चाहते।
गांव के युवाओं का कहना है कि वे पढ़े-लिखे हैं, लेकिन बुजुर्गों की मान्यताओं को नहीं तोड़ सकते। उनका मानना है कि अगर वे होली खेलेंगे तो कोई अनहोनी हो सकती है। 150 वर्षों से होली नहीं मना रहा यह गांव, न जलती होलिका, न उड़ता गुलाल!
क्या कभी बदलेगी यह परंपरा?
आज जब देशभर में होली के रंग बिखरते हैं, तो खरहरी गांव का यह अंधविश्वास कई सवाल खड़े करता है। क्या यह गांव कभी इस मान्यता से बाहर आकर खुशियों का त्योहार मना पाएगा? 150 वर्षों से होली नहीं मना रहा यह गांव, न जलती होलिका, न उड़ता गुलाल!



















