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“अरे चाचा, मंत्रालय लिखा है मूत्रालय नहीं!” — दिल्ली में वायरल वीडियो ने खोली सिविक सेंस की पोल

? अरे चाचा, मंत्रालय लिखा है मूत्रालय नहीं! — दिल्ली में वायरल वीडियो ने खोली सिविक सेंस की पोल

? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खड़े किए गंभीर सवाल

दिल्ली जैसे हाईटेक शहर में भी जब कोई मंत्रालय के बाहर खुले में पेशाब करता है, तो सवाल सिर्फ शर्म का नहीं बल्कि सिविक सेंस (Civic Sense) का बन जाता है। हाल ही में एक 6-सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयके बाहर फुटपाथ पर खुले में पेशाब करता नजर आया।“अरे चाचा, मंत्रालय लिखा है मूत्रालय नहीं!”

वीडियो में कार चालक उसे रोकते हुए कहता है:

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अरे चाचा, मंत्रालय लिखा है, मूत्रालय नहीं!

? वीडियो की कहानी: मिनटों में मचा सोशल मीडिया पर बवाल

  • वीडियो को X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल देसी मोजितो ने शेयर किया
  • साथ में लिखा गया —
    कोई सिविक सेंस नहीं है और फिर सरकार को दोष देंगेजबकि दीवार के ठीक सामने ही पब्लिक टॉयलेट है।

? सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: हंसी और गुस्से का मिला-जुला तूफान

  • मीमबाजों ने जमकर उड़ाया मज़ाक:
    • “जब मूत्रालय की तलाश में मंत्रालय पहुंच जाए इंसान!”
    • “देश बदल रहा है, लोग नहीं!”
  • गंभीर टिप्पणियाँ भी आईं:
    • “ये सिर्फ गंदगी नहीं, सोच की भी गंदगी है।”
    • “दिल्ली वालों, अब तो शर्म करो!”

?️ क्या सच में टॉयलेट्स की कमी है?

बहस दो हिस्सों में बंटी:

? पक्ष 1: टॉयलेट्स कम हैं, मजबूरी में लोग ऐसा करते हैं
? पक्ष 2: टॉयलेट सामने होते हुए भी लोग आदत और आलस में खुले में पेशाब करते हैं

? NDMC और MCD के अनुसार, दिल्ली में हर 500 मीटर पर पब्लिक टॉयलेट उपलब्ध है। बावजूद इसके ऐसी घटनाएं साबित करती हैं कि समस्या व्यवस्था की नहीं, मानसिकता की है।“अरे चाचा, मंत्रालय लिखा है मूत्रालय नहीं!”

? “शौच निषेध” लिखने से सोच नहीं बदलती!

मंत्रालय जैसे गंभीर स्थानों के बाहर पेशाब करना यह दर्शाता है कि सार्वजनिक जगहों की गरिमा के प्रति लोगों में कितनी अज्ञानता और लापरवाही है।

? सिविक सेंस बनाम बढ़ती जनसंख्या

✅ हां, भारत में हर मिनट 25 से ज्यादा बच्चे जन्म लेते हैं, लेकिन
❌ यह कोई बहाना नहीं कि नागरिक अपनी जिम्मेदारियों से बचें।

स्मार्ट सिटी सिर्फ बिल्डिंग्स से नहीं, स्मार्ट बिहेवियर से बनती है।

✅ समाधान क्या हो सकते हैं?

  1. ? ऑन-द-स्पॉट जुर्माना: खुले में पेशाब करते पकड़े जाने पर तुरंत जुर्माना
  2. ? सिविक सेंस एजुकेशन: स्कूल, कॉलेज, ऑफिस में ट्रेनिंग
  3. ? टॉयलेट लोकेटर ऐप्स को प्रमोट करना
  4. ? साफ-सुथरे सार्वजनिक टॉयलेट और उनकी नियमित निगरानी
  5. ? वीडियो सबूत पर सख्त एक्शन — वायरल वीडियो से ही कार्रवाई शुरू हो

? जनता की मांग: टॉयलेट्स दिखें Google Maps पर!

हजारों लोगों ने मांग की कि

“पब्लिक टॉयलेट्स की लोकेशन को Google Maps में हाइलाइट किया जाए।”

वीडियो जितना मज़ाकिया है, उससे ज्यादा गंभीर भी है।
यह बताता है कि भारत को सिर्फ डिजिटल इंडिया नहीं, डिसिप्लिन इंडिया भी बनाना होगा।

 

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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