
NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया, तो किसी को मौसी ने दी उड़ान; पढ़िए टॉपर्स की दिल छू लेने वाली कहानी
NEET-UG के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मेहनत और जज्बे के आगे हर चुनौती छोटी पड़ जाती है। इस साल भोपाल के होनहार छात्रों ने अपनी कामयाबी से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। लेकिन उनकी रैंक के पीछे छिपी हैं त्याग, प्रेरणा और परिवार के अटूट समर्थन की वो कहानियां, जो हर किसी के लिए एक मिसाल हैं। आइए मिलते हैं भोपाल के उन तीन सितारों से, जिन्होंने NEET में अपनी सफलता का परचम लहराया है।NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया
दादा-दादी की सीख और माता-पिता का सपना: आगम जैन ने AIR 45 के साथ रचा इतिहास
नाम: आगम जैन | ऑल इंडिया रैंक: 45
भोपाल के टॉप रैंकर आगम जैन के लिए डॉक्टर बनना सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने जैसा था। आगम बताते हैं, “मेरे माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और मेरे पिता के अस्पताल का नाम भी ‘आगम आई हॉस्पिटल’ है। इसलिए मेरे दिल में हमेशा से डॉक्टर बनने की एक गहरी इच्छा थी।”NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया
अपनी सफलता का राज साझा करते हुए आगम कहते हैं कि उन्होंने क्वालिटी पर फोकस किया, मात्रा पर नहीं। वह रोजाना 3-4 घंटे की अनुशासित पढ़ाई करते थे, जो परीक्षा के समय 8-9 घंटे तक पहुंच जाती थी। वह मानते हैं कि कोई भी विषय कठिन नहीं होता, अगर उसे पूरी लगन से समझा जाए। आगम अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा-दादी को भी देते हैं, जिन्होंने उन्हें हमेशा “प्रोग्रेसिव” रहने और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनने की सीख दी।NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया
कोविड में मां को खोया, मौसी बनीं सहारा: सौम्या ने NEET-JEE दोनों क्रैक कर पेश की मिसाल
नाम: सौम्या तिवारी | ऑल इंडिया रैंक: 506
सौम्या तिवारी की कहानी दृढ़ संकल्प और असीम प्रेम की एक असाधारण मिसाल है। साल 2021 में कोविड ने सौम्या से उनकी मां को छीन लिया, लेकिन उनकी मौसी विंध्या शर्मा ने उन्हें कभी मां की कमी महसूस नहीं होने दी। सौम्या कहती हैं, “मेरी मां ने मेरे अंदर पढ़ने की इच्छा जगाई, और मेरी मौसी ने उस इच्छा को पंख दिए।”NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया
सौम्या की मेहनत का आलम यह है कि उन्होंने न सिर्फ NEET, बल्कि JEE की परीक्षा भी अच्छे अंकों से पास की है। गणित उनका पसंदीदा विषय होने के कारण वह IIT में दाखिला लेंगी। वह कहती हैं, “इन सबमें सबसे बड़ा योगदान मेरी मौसी का है। आज मैं अपनी मौसी में ही अपनी मां की झलक देखती हूं।”NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया
9वीं कक्षा से एक ही लक्ष्य: आर्यमन ठाकुर ने फोकस और मेहनत से पाई 568वीं रैंक
नाम: आर्यमन ठाकुर | ऑल इंडिया रैंक: 568
आकाश इंस्टीट्यूट के छात्र आर्यमन ठाकुर की सफलता एकाग्रता और शुरुआती मेहनत का एक बेहतरीन उदाहरण है। आर्यमन ने 9वीं कक्षा से ही NEET को अपना लक्ष्य बना लिया था और इसके लिए वह रोजाना 8-9 घंटे की पढ़ाई करते थे। उनका सफलता का मंत्र सरल है, “अगर आप अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह से केंद्रित हैं, तो उसे हासिल करना मुश्किल नहीं है। मैंने भी बस यही किया और आज अपने लक्ष्य को पा लिया।”NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया
भोपाल के इन होनहारों ने यह साबित कर दिया है कि पारिवारिक समर्थन और अटूट लगन के साथ कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।NEET में भोपाल का डंका: किसी ने मां का सपना पूरा किया



















