केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’! 24 घंटे में 2 भीषण हादसे, प्रशासन की नींद कब टूटेगी?

केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’! 24 घंटे में 2 भीषण हादसे, प्रशासन की नींद कब टूटेगी?
मुख्य बिंदु:-
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पेंड्रा-बिलासपुर मार्ग पर स्थित केंदा घाट हादसों का अड्डा बना।
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बीते 24 घंटों में दो बड़े सड़क हादसे, एक ट्रक फंसा तो दूसरा पिकअप पलटा।
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जर्जर सड़क और सालों से अधूरे पड़े निर्माण कार्य को बताया जा रहा है हादसों की वजह।
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मानसून की दस्तक के साथ निर्माण कार्य पूरी तरह ठप, बढ़ी लोगों की चिंता।
पेंड्रा : पेंड्रा को बिलासपुर से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों मौत को दावत दे रहा है। इस मार्ग पर स्थित केंदा घाट (बंजारी घाट) अपनी बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले 24 घंटों के भीतर यहां दो अलग-अलग भीषण सड़क हादसे हुए हैं, जिसने इस मार्ग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि इन हादसों में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’!
एक ट्रक फंसा, दूसरा पिकअप पलटा… 24 घंटे की खौफनाक कहानी

पहली घटना में, कोयले से लदा एक भारी-भरकम ट्रक रायपुर की ओर जा रहा था। जैसे ही ट्रक केंदा घाट की खतरनाक ढलान पर पहुंचा, वह अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बुरी तरह फंस गया। चालक और खलासी ने किसी तरह वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई।केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’!
इसके कुछ ही घंटों बाद, दूसरा हादसा हुआ। बिलासपुर की थोक मंडी से सब्जी लादकर पेंड्रा जा रही एक पिकअप गाड़ी घाट के गड्ढों के कारण अपना संतुलन खो बैठी और बीच सड़क पर ही पलट गई। इस हादसे में चालक और व्यापारी को मामूली चोटें आईं, लेकिन उनकी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’!
क्यों बना है केंदा घाट हादसों का ‘हॉटस्पॉट’?

स्थानीय निवासियों और इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों का कहना है कि केंदा घाट का लगभग तीन किलोमीटर का हिस्सा किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं है। इस पूरे हिस्से में जानलेवा गड्ढे हैं और सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है, जिससे यहां गाड़ी चलाना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है।केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’!
नाम का ‘नेशनल हाईवे’, काम का नहीं!
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस मार्ग को अब राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) का दर्जा मिल चुका है। इसके बावजूद, पिछले कई सालों से यहां सड़क निर्माण का काम अधूरा पड़ा है। प्रशासन की इस घोर लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’!
अब जबकि प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है, तो निर्माण कार्य भी पूरी तरह से बंद हो गया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कब तक लोगों को एक सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए इंतजार करना पड़ेगा?केंदा घाट बना ‘मौत का घाट’!









