भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी, 300 रुपये में खरीदकर प्यास बुझाने को मजबूर लोग

भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी, 300 रुपये में खरीदकर प्यास बुझाने को मजबूर लोग
भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी, भिलाई में मानसून की शुरुआत के साथ ही भिलाई स्टील प्लांट (BSP) टाउनशिप के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दशकों पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों के कारण नलों से मटमैला और गंदा पानी आ रहा है, जिससे लगभग एक लाख की आबादी प्रभावित है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग बीमारियों से बचने के लिए हर महीने सैकड़ों रुपये खर्च कर बाजार से पीने का पानी खरीदने को मजबूर हैं।
क्यों है भिलाई की जनता परेशान? नल से आ रहा है बीमारियों का खतरा
BSP टाउनशिप के 20,000 से अधिक आवासों में रहने वाले लोगों के लिए यह हर साल की कहानी बन चुकी है। बारिश होते ही नलों से आने वाला गंदा पानी अपने साथ डायरिया, पीलिया और पेट से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा लेकर आता है। लोगों का कहना है कि वे इस पानी का उपयोग सिर्फ नहाने और कपड़े धोने जैसे कामों के लिए कर पा रहे हैं, पीना তো दूर की बात है। भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी
समस्या की जड़: आधी सदी पुरानी और नजरअंदाज की गई पाइपलाइन
इस गंभीर समस्या का मुख्य कारण 50 साल से भी अधिक पुरानी पेयजल और सीवरेज लाइनें हैं। निवासियों का आरोप है कि BSP प्रबंधन ने प्लांट के अंदर तो मशीनों और गैस लाइनों को समय पर अपग्रेड कर दिया, लेकिन टाउनशिप के बुनियादी ढांचे पर कभी ध्यान नहीं दिया। भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी
पुरानी पाइपलाइन: पानी की लाइनें इतनी पुरानी हो चुकी हैं कि जगह-जगह से लीक होती रहती हैं।
सीवरेज का रिसाव: कई जगहों पर पेयजल पाइपलाइन के साथ-साथ चल रही सीवरेज लाइनें भी जर्जर हैं, जिससे गंदे पानी का रिसाव साफ पानी में मिल जाता है।
दोहरी मार: BSP को भी पैसा, बाहर भी खर्च
टाउनशिप के निवासी पानी के लिए दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ वे बीएसपी को पानी का बिल चुकाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई से पीने का साफ पानी खरीदना पड़ रहा है।
सेक्टर-4 के एक निवासी ने बताया कि वे बीएसपी कर्मचारी हैं, लेकिन नल में गंदा पानी आने के कारण उन्हें हर दिन वाटर एटीएम से पानी के जार भरने पड़ते हैं। इसके लिए उन्हें हर महीने लगभग 300 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। यह उन हजारों परिवारों की कहानी है जो पानी की शुद्धता के लिए अपनी जेब ढीली कर रहे हैं। भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी
क्या है समाधान? जनता ने सुझाया रास्ता
इस समस्या से त्रस्त लोगों का मानना है कि इसका स्थायी समाधान केवल एक ही है – पुरानी पाइपलाइनों को बदलना। उन्होंने प्रबंधन को एक ठोस रास्ता भी सुझाया है। लोगों का कहना है कि बीएसपी प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से 50 साल पुरानी पेयजल और सीवरेज, दोनों लाइनों को बदलने का काम शुरू करना चाहिए। अगर प्रबंधन अकेले यह खर्च उठाने में असमर्थ है, तो उसे नगर निगम, भिलाई के साथ मिलकर इस परियोजना को पूरा करना चाहिए ताकि नागरिकों को स्वच्छ पानी मिल सके। भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी
कहां हैं जनप्रतिनिधि?
पहले यूनियन नेता और जनप्रतिनिधि ऐसी समस्याओं पर मुखर रहते थे, लेकिन अब उनकी सक्रियता केवल ज्ञापन सौंपने तक सीमित रह गई है। जनता को अब प्रबंधन से ठोस कार्रवाई का इंतजार है, ताकि उन्हें हर साल बरसात में इस नरक से न गुजरना पड़े। भिलाई में मानसून की पहली दस्तक बनी आफत: 50 साल पुरानी पाइपलाइन से घरों में पहुंच रहा गंदा पानी



















