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रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी, ऐसे लुट रही है जनता!

रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी, ऐसे लुट रही है जनता!

रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दवाओं के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है, जहाँ मरीजों और आम जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि शहर के कई मेडिकल स्टोर संचालक जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड बताकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। यह गोरखधंधा खासकर एम्स और अंबेडकर अस्पताल जैसे बड़े अस्पतालों के आसपास फल-फूल रहा है।

कैसे चल रहा है मुनाफे का यह ‘खेल’?

यह पूरा खेल बहुत ही शातिर तरीके से खेला जा रहा है।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

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  • पहचान का अभाव: जेनेरिक दवाओं की कोई विशिष्ट पहचान या पैकेजिंग नहीं होती, जिससे आम आदमी के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि दवा जेनेरिक है या ब्रांडेड।

  • गुमराह करने की रणनीति: कई मेडिकल स्टोर संचालक अब अपनी दुकान पर जेनेरिक और ब्रांडेड, दोनों तरह की दवाइयां एक साथ रखते हैं। जब कोई ग्राहक दवा खरीदने आता है, तो उसे जेनेरिक दवा थमा दी जाती है, लेकिन कीमत ब्रांडेड दवा वाली या उससे मिलती-जुलती वसूली जाती है।

  • छूट का छलावा: ब्रांडेड दवाओं पर आमतौर पर 10 से 15% की छूट दी जाती है। यही छूट जेनेरिक दवा पर देकर ग्राहक को यह यकीन दिलाया जाता है कि उसे एक महंगी ब्रांडेड दवा पर डिस्काउंट मिला है, जबकि असलियत में उसे कई गुना सस्ती दवा बहुत ज़्यादा कीमत पर बेची गई होती है।

जेनेरिक बनाम ब्रांडेड: कीमत में जमीन-आसमान का अंतर

धोखाधड़ी का एहसास लोगों को तब होता है, जब वे वही दवा किसी सरकारी पहल वाले रेडक्रॉस या धनवंतरि मेडिकल स्टोर से खरीदते हैं।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

  • धनवंतरि/रेडक्रॉस स्टोर: यहाँ जेनेरिक दवाएं 60% से 72% तक की भारी छूट पर मिलती हैं।

  • निजी मेडिकल स्टोर: वही जेनेरिक दवा निजी स्टोर पर सिर्फ 10-15% की छूट के साथ प्रिंट रेट के आसपास बेची जा रही है।

यहाँ मुद्दा दवाओं की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मुनाफाखोरी का है, जिससे आम जनता ठगी जा रही है।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

एक उदाहरण: ऐसे समझिए ठगी का पूरा गणित

एक मामले में, एक ग्राहक ने एक जानी-मानी कंपनी की 10 गोलियों वाली दवा धनवंतरि मेडिकल स्टोर से खरीदी, जो 72% छूट के बाद सिर्फ 40 रुपये में मिली। जब वही दवा एक अन्य निजी मेडिकल स्टोर से खरीदी गई, तो 15% की छूट के बाद उसकी कीमत 120 रुपये वसूली गई।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

जब ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताई और बताया कि यह एक जेनेरिक दवा है, तो दुकानदार यह मानने को ही तैयार नहीं हुआ और कहा कि उसे यह दवा इससे कम कीमत पर नहीं मिल सकती। यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे आम लोगों को खुलेआम लूटा जा रहा है।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

गुणवत्ता में नहीं, नीयत में है खोट

नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर के रिटायर्ड डीन डॉ. सीके शुक्ला के अनुसार, जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं की क्वालिटी में कोई खास अंतर नहीं होता है। आज देश की बड़ी-बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनियां भी जेनेरिक दवाएं बना रही हैं। ये दवाएं अस्पतालों में भारी छूट के साथ बेची जाती हैं, लेकिन इसका सीधा लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पाता, क्योंकि बिचौलिए और कुछ दुकानदार इस मुनाफे को अपनी जेब में भर लेते हैं।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

यह मामला मरीजों के विश्वास के साथ एक बड़ा धोखा है, जहाँ उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी की जा रही है।रायपुर में दवाओं का बड़ा खेल: जेनेरिक को ब्रांडेड बताकर हो रही है अंधाधुंध मुनाफाखोरी

Dr. Tarachand Chandrakar

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