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जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री: भावुक आचार्यश्री बोले – “यह मेरा नहीं, संत समाज का सम्मान है”

जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री: भावुक आचार्यश्री बोले – “यह मेरा नहीं, संत समाज का सम्मान है”, नागौर में जैन समाज की ओर से आयोजित भव्य अभिनंदन समारोह में जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर को प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर देशभर से जैन समाज के श्रद्धालु और श्री संघ पहुंचे। राष्ट्रपति भवन के मॉडल पर बने डोम में आयोजित इस समारोह में सैकड़ों जैन श्रावकों की उपस्थिति में आचार्यश्री ने अपने सम्मान को पूरे संत समाज को समर्पित किया।

तीन राज्यों के राज्यपालों ने किया अलंकृत: एक ऐतिहासिक पल

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समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को 24 कैरेट सोने की स्याही से लिखा अभिनंदन पत्र भेंट किया। जैसे ही पत्र सौंपा गया, पूरा पंडाल आचार्यश्री के जयकारों से गूंज उठा। यह क्षण भारतीय परंपरा और संत समाज के प्रति आदर का प्रतीक बन गया।जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री
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आचार्यश्री का भावुक उद्बोधन: “मानव कल्याण ही सर्वोपरि”

जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री: भावुक आचार्यश्री बोले - "यह मेरा नहीं, संत समाज का सम्मान है"

पद्मश्री जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे संत समाज का सम्मान है। उन्होंने इसे उस परंपरा की प्रतिष्ठा बताया, जिसे उन्होंने चुना है। आचार्यश्री ने इस बात पर जोर दिया कि संतों के मन में जन-जन के कल्याण की भावना निहित होती है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें जीवन भर मानव कल्याण और जनहित के लिए काम करते रहने के संकल्प की याद दिलाता रहेगा। आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी सम्मान के लिए काम नहीं किया, क्योंकि संत तो समाज के पथ प्रदर्शक होते हैं, जिनका जीवन समाज को सही दिशा देने के लिए होता है।जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री

पद्मश्री सूरीश्वर के चार अनमोल संदेश

जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री: भावुक आचार्यश्री बोले - "यह मेरा नहीं, संत समाज का सम्मान है"

जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर ने समाज के लिए चार महत्वपूर्ण संदेश दिए, जो जीवन को सही दिशा देने का मार्ग प्रशस्त करते हैं:

  1. किसी का अहित नहीं करेंगे।

  2. सेवा, करुणा और सहिष्णुता को अपनाएंगे।

  3. मानवता की सेवा से ऊंचा कोई काम नहीं है।

  4. अपने लिए जिए तो क्या जिए, जियो तो जियो हजारों के लिए।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान: “सेवा और त्याग हमारे आदर्श”

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारतीय समाज ने हमेशा संतों से प्रेरणा ली है। उन्होंने सेवा और त्याग को भारतीय आदर्श बताया और कहा कि जैनाचार्य में इन दोनों गुणों का संगम है। खान ने जैन दर्शन के “जियो और जीने दो” के संदेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज समाज में रंग, जाति और क्षेत्र के आधार पर श्रेष्ठता दिखाने की होड़ है, ऐसे में यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में किसी भी धर्म में स्वयं के लिए प्रार्थना नहीं की जाती, बल्कि सबकी खुशहाली और उन्नति के लिए की जाती है।जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री

राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया: “साधु बनते हैं मानव कल्याण के लिए”

पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने जैनाचार्य नित्यानंद के नौ वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण करने के कठिन मार्ग की सराहना की। उन्होंने कहा कि आचार्य नित्यानंद ने आत्मकल्याण के साथ-साथ मानव कल्याण के लिए भी काम किया है। कटारिया ने कहा कि साधु आमतौर पर आत्मकल्याण के लिए बनते हैं, लेकिन नित्यानंद जैसे संत मानव कल्याण के लिए बनते हैं। उन्होंने चिकित्सा, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में की गई सेवाओं का उल्लेख किया और कहा कि यह सम्मान आचार्यश्री का नहीं, बल्कि भगवान महावीर के “जियो और जीने दो” सिद्धांत का सम्मान है।जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े: “शब्द हमारी संपत्ति है”

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने नागौरवासियों से “मिच्छामि दुक्कड़म…” कहते हुए क्षमा याचना की। उन्होंने क्षमा पर्व को मानवता का श्रेष्ठ उदाहरण बताया और कहा कि यह स्वयं को शुद्ध करने का मार्ग है। बागड़े ने भारतीय संस्कृति की अमरता पर जोर दिया और कहा कि साधु-संतों के संस्कारों से हमारा जीवन सफल होता है। उन्होंने “शब्द हमारी संपत्ति है” का महत्व समझाया और कहा कि इसका प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए। राज्यपाल ने सत्संग से मनुष्य के श्रेष्ठ बनने और मन की निर्मलता के महत्व पर भी प्रकाश डाला।जैनाचार्य नित्यानंद सूरीश्वर को पद्मश्री

Nidar Chhattisgarh Desk

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