बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम, लेकिन इंजीनियरों की जेब पर पड़ेगी मार; जानें पूरा मामला
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों का 'तुगलकी' फरमान: बिजली चोरी रोकने में नाकामी का ठीकरा जूनियर इंजीनियरों (JE) और असिस्टेंट इंजीनियरों (AE) पर फोड़ा, वेतन से कटेगी मुखबिर को दी जाने वाली इनाम की राशि।

भोपाल/जबलपुर: मध्य प्रदेश में बिजली चोरी की समस्या से निपटने के लिए विद्युत वितरण कंपनियों ने एक ऐसा ‘अनोखा प्रयोग’ शुरू किया है, जिसने विभाग के भीतर भूचाल ला दिया है। बिजली चोरी रोकने में वर्षों से असफल रही कंपनियों ने अब अपनी नाकामी का बोझ सीधे मैदानी इंजीनियरों के कंधों पर डाल दिया है।
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जारी एक विवादित आदेश के अनुसार, अब बिजली चोरी पकड़वाने वाले मुखबिरों को दिया जाने वाला इनाम कंपनी के खजाने से नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) की सैलरी से काटकर दिया जाएगा। इस आदेश के बाद से इंजीनियरों में भारी आक्रोश है।बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम
इनाम की राशि: 50 रुपये से 50 हजार तक
कंपनी ने बिजली चोरी की सूचना देने के लिए ‘वी-मित्र’ (V-Mitra) ऐप को माध्यम बनाया है। बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम. योजना के मुताबिक:
कोई भी व्यक्ति इस ऐप पर बिजली चोरी की शिकायत दर्ज करा सकता है।
यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता को 50 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का नकद इनाम दिया जाएगा।
हैरानी की बात यह है कि इनाम की यह राशि 7 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी, लेकिन यह पैसा उस इलाके के जेई और एई के वेतन से काटा जाएगा।
इंजीनियरों में क्यों है नाराजगी?
अगस्त में जारी हुए इस आदेश के बाद से कई जिलों के इंजीनियर मानसिक दबाव में हैं। उनका तर्क है कि विभाग में जब भी कोई उपलब्धि हासिल होती है, तो उसका श्रेय ऊपर से नीचे तक सभी अधिकारी साझा करते हैं। लेकिन जब बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी तय करने की बात आई, तो केवल मैदानी अमले (Field Staff) को निशाना बनाया गया।बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम
इंजीनियरों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। डीई (Divisional Engineer) या अन्य वरिष्ठ अधिकारी, जो एसी कमरों में बैठते हैं, उन पर कार्यवाही का खतरा न के बराबर है, क्योंकि वे सीधे फील्ड में नहीं होते। जबकि जेई और एई सीधे जनता के बीच कार्य करते हैं, इसलिए गाज उन्हीं पर गिर रही है।बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम
नौकरी छोड़ने तक की नौबत
विभाग के इस फैसले से इंजीनियरों में इतना असंतोष है कि कई कर्मचारी नौकरी छोड़ने का मन बना रहे हैं। उनका कहना है कि बिजली चोरी एक सामाजिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या भी है, जिसे केवल इंजीनियरों के वेतन कटौती से नहीं सुधारा जा सकता।बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम
विवादित आदेशों का इतिहास
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियां इससे पहले भी अपने अजीबोगरीब फैसलों के कारण विवादों में रही हैं:
वेतन कटौती की धमकी: कुछ समय पहले विभाग ने आदेश दिया था कि यदि किसी क्षेत्र में 10 घंटे से ज्यादा बिजली सप्लाई दी गई, तो कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा। चौतरफा आलोचना के बाद कंपनी को यह आदेश वापस लेना पड़ा था।
अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की तैयारी: पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के इस फॉर्मूले को अब पश्चिम और मध्य क्षेत्र की बिजली कंपनियों में भी लागू करने की तैयारी चल रही है, जिससे पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन की संभावना बढ़ गई है।
ऐसे होती है शिकायत
वी-मित्र ऐप पर आम नागरिक अपनी पहचान गुप्त रखते हुए या अपना नाम, नंबर और अकाउंट नंबर देकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जैसे ही चोरी प्रमाणित होती है, सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से संबंधित क्षेत्र के इंजीनियर की सैलरी से कटौती का प्रोसेस शुरू कर देता है।बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम
अब देखना यह होगा कि इंजीनियरों के भारी विरोध के बाद क्या कंपनी प्रबंधन इस विवादित आदेश को वापस लेता है या फिर इंजीनियरों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।बिजली चोरी पकड़ने वाले को मिलेगा 50 हजार तक का इनाम



















