एमपी सरकार की 32 वेबसाइटों पर बड़ा साइबर हमला: रैनसमवेयर के जरिए हैकर्स ने बनाया निशाना, जानें क्या है ‘जीरो-डे’ खतरा

मध्यप्रदेश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक बड़ी सेंधमारी का मामला सामने आया है। शातिर हैकर्स ने प्रदेश सरकार की 32 महत्वपूर्ण वेबसाइटों और कई मोबाइल एप्लिकेशन पर ‘रैनसमवेयर’ हमला (Ransomware Attack) कर उन्हें ठप करने की कोशिश की। इस हमले के पीछे डार्क वेब के जरिए ‘जीरो-डे वलनरेबिलिटी’ (Zero-day Vulnerability) का इस्तेमाल किया गया है।
डार्क वेब से हुआ हमला: 32 वेबसाइटें और 21 ऐप्स निशाने पर
साइबर विशेषज्ञों की जांच में खुलासा हुआ है कि हैकर्स ने सॉफ्टवेयर की अज्ञात खामियों का फायदा उठाकर सरकारी पोर्टल्स में प्रवेश किया। इस हमले से न केवल 32 वेबसाइटें प्रभावित हुईं, बल्कि सरकार द्वारा संचालित 21 मोबाइल ऐप्स पर भी संकट के बादल मंडराने लगे थे। हैकर्स ने सिस्टम को लॉक कर डेटा के बदले फिरौती की मंशा से यह हमला किया था।एमपी सरकार की 32 वेबसाइटों पर बड़ा साइबर हमला
MP-CERT की बड़ी कामयाबी: 48 घंटे में दोबारा बहाल हुए पोर्टल्स
साइबर अटैक की जानकारी मिलते ही ‘मध्यप्रदेश कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम’ (MP-CERT) और MPSEDC के अधिकारी सक्रिय हो गए। टीम ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए मात्र 48 घंटों के भीतर सभी प्रभावित वेबसाइटों को रिकवर कर लिया। अधिकारियों का दावा है कि फिलहाल डेटा सुरक्षित है और साइटों को साइबर खतरों से बचाने के लिए सुरक्षा कवच और मजबूत किया जा रहा है।एमपी सरकार की 32 वेबसाइटों पर बड़ा साइबर हमला
क्या है ‘जीरो-डे वलनरेबिलिटी’?
यह एक ऐसा साइबर हमला होता है जिसमें हैकर्स सॉफ्टवेयर की उस कमी या बग (Bug) का फायदा उठाते हैं, जिसकी जानकारी खुद सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी को भी नहीं होती। चूंकि कंपनी के पास इस खामी को सुधारने के लिए ‘जीरो-डे’ (शून्य दिन) का समय होता है, इसलिए इसे बेहद खतरनाक और जटिल हमला माना जाता है।एमपी सरकार की 32 वेबसाइटों पर बड़ा साइबर हमला
आसान भाषा में समझें: क्या होता है रैनसमवेयर अटैक?
कल्पना कीजिए कि आप अपना कंप्यूटर या मोबाइल खोलें और आपकी सभी जरूरी फाइलें, फोटो और दस्तावेज अचानक लॉक हो जाएं। स्क्रीन पर एक मैसेज आए कि यदि आप अपना डेटा वापस चाहते हैं, तो आपको एक मोटी रकम (रैनसम) चुकानी होगी। इसी प्रक्रिया को रैनसमवेयर अटैक कहते हैं।एमपी सरकार की 32 वेबसाइटों पर बड़ा साइबर हमला
कैसे घुसता है वायरस? अक्सर किसी अनजान लिंक, संदिग्ध ईमेल या असुरक्षित वेबसाइट पर क्लिक करने से यह मैलवेयर आपके सिस्टम में प्रवेश कर जाता है।
भविष्य के लिए बड़ी चेतावनी
हालांकि राज्य सरकार ने इस हमले को विफल कर दिया है, लेकिन आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि यह भविष्य के लिए एक बड़ा अलर्ट है। सरकारी डेटा की सुरक्षा के लिए अब ‘जीरो ट्रस्ट’ मॉडल और एडवांस फायरवॉल्स की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि डार्क वेब से होने वाले ऐसे हमलों को शुरुआत में ही रोका जा सके।एमपी सरकार की 32 वेबसाइटों पर बड़ा साइबर हमला



















