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बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान: 17 साल बाद दिया पहला भाषण, 1971 का जिक्र कर पाकिस्तान और भारत को क्या संकेत दिए?

बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान: 17 साल बाद दिया पहला भाषण, 1971 का जिक्र कर पाकिस्तान और भारत को क्या संकेत दिए? बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक्टिंग चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल के लंबे इंतजार के बाद स्वदेश लौट आए हैं। राजधानी ढाका में उनके भव्य स्वागत ने देश के बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है।

17 साल का वनवास खत्म: ढाका में हुआ जोरदार स्वागत

बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान:गुरुवार को ढाका के पूर्बाचल इलाके में स्थित 300 फीट रोड पर तारिक रहमान का ऐतिहासिक स्वागत किया गया। हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक अपने नेता की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे। दोपहर करीब 3:52 बजे जैसे ही तारिक रहमान स्वागत मंच पर पहुंचे, पूरा इलाका नारों से गूंज उठा। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत बेहद भावुक शब्दों ‘प्यारे बांग्लादेश’ से की।

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शांति और धैर्य की अपील: समर्थकों को खास निर्देश

बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान:अपने पहले सार्वजनिक भाषण में तारिक रहमान ने संयम और अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और देश की जनता से अपील की कि वे देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गड़बड़ी से बचा जाना चाहिए और आने वाली चुनौतियों का सामना धैर्य के साथ करना होगा।

1971 का जिक्र और पाकिस्तान को कड़ा संदेश

बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान:तारिक रहमान के भाषण में सबसे चर्चा का विषय ‘1971 के मुक्ति संग्राम’ का जिक्र रहा। उन्होंने कहा, “हमारी प्यारी मातृभूमि 1971 में लाखों शहीदों के खून की कुर्बानी से हासिल हुई थी।” राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान के जरिए उन्होंने पाकिस्तान को एक सीधा और कड़ा संदेश दिया है कि बांग्लादेश अपनी संप्रभुता और गौरवशाली इतिहास को सर्वोपरि रखता है।

भारत के साथ रिश्तों पर क्या बोले पूर्व राजनयिक?

बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान:तारिक रहमान की वापसी पर भारतीय कूटनीतिक हलकों में भी हलचल तेज है। भारत के पूर्व राजदूतों का मानना है कि उनका लौटना बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विशेषज्ञों के अनुसार, बेगम जिया के खराब स्वास्थ्य के दौरान तारिक ने विदेश में रहकर भी पार्टी को बखूबी संभाला है। भारतीय नजरिए से देखा जाए तो बांग्लादेश की स्थिरता के लिए भारत की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता और तारिक रहमान के आगामी कदम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेंगे।

राजनीतिक गलियारों में भविष्य की सुगबुगाहट

बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान: तारिक रहमान की वापसी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में BNP बांग्लादेश की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंकने वाली है। 17 साल बाद उनकी घर वापसी केवल एक नेता की वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

Dr. Tarachand Chandrakar

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