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Chhattisgarh Rajbhasha Aayog News: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग: ‘हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे’ का नारा क्या सिर्फ चुनावी? 7 साल से अध्यक्ष-सदस्यों की कुर्सियां खाली

Chhattisgarh Rajbhasha Aayog News: छत्तीसगढ़ की अस्मिता और पहचान मानी जाने वाली ‘छत्तीसगढ़ी भाषा’ को लेकर सूबे की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन को दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन के लिए बना राजभाषा आयोग आज भी नेतृत्वविहीन है। ‘हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे’ जैसे लोकलुभावन नारों के बीच सवाल यह उठ रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ी भाषा एक बार फिर हाशिये पर धकेल दी गई है?

नारे बड़े, पर नियुक्तियां शून्य: आखिर क्यों है आयोग निष्क्रिय?

Chhattisgarh Rajbhasha Aayog News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अक्सर अपने भाषणों में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाषा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। भाजपा इस बात का श्रेय भी लेती रही है कि उनके शासनकाल में ही छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिला। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बीते 7 वर्षों से राजभाषा आयोग बिना अध्यक्ष और सदस्यों के चल रहा है। आयोग की फाइलें धूल फांक रही हैं और नियुक्तियों को लेकर सरकार की ओर से फिलहाल कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं।

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क्या चुनावी पोस्टर तक ही सीमित है ‘छत्तीसगढ़ी’ का प्यार?

Chhattisgarh Rajbhasha Aayog News: विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक यह केवल कागजों पर मौजूद एक संस्था बनकर रह जाएगा। छत्तीसगढ़ी भाषा के मानकीकरण (Standardization), उसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में प्रभावी ढंग से लागू करने और शासकीय कार्यों में इसके उपयोग को बढ़ावा देने जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। ऐसे में सरकार के “संवारने” के दावों पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

भाषाविदों और कलाकारों में बढ़ती निराशा

Chhattisgarh Rajbhasha Aayog News: छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए संघर्ष करने वाले भाषाविदों, लेखकों और कलाकारों का कहना है कि नेतृत्व के अभाव में आयोग कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले पा रहा है।

  • प्रकाशन कार्य ठप: नई रचनाओं और शोध कार्यों का प्रकाशन रुक गया है।

  • कलाकारों की उपेक्षा: भाषा से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन नहीं हो रहा है।

  • अकादमिक नुकसान: शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ी भाषा को उचित स्थान दिलाने की मुहीम सुस्त पड़ गई है।

भाजपा सरकार के लिए साख की चुनौती

Chhattisgarh Rajbhasha Aayog News: पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में जिस आयोग को नई ऊंचाइयां देने का दावा किया जाता था, आज वही आयोग अपनी पहचान के लिए जूझ रहा है। जनता अब केवल भावनात्मक भाषणों से संतुष्ट नहीं है; वे ठोस कार्रवाई और नियुक्तियां चाहते हैं। क्या साय सरकार अपने दो साल के कार्यकाल के बाद अब इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठाएगी या छत्तीसगढ़ी भाषा केवल “सियासी मुद्दा” बनकर रह जाएगी?

Dr. Tarachand Chandrakar

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