
Lal Bahadur Shastri 60th Death Anniversary: आज भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 60वीं पुण्यतिथि है। सादगी, ईमानदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति (Strong Willpower) के प्रतीक शास्त्री जी का जीवन हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा है। जब भी 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की बात होती है, तो शास्त्री जी का वो निडर चेहरा सामने आता है जिसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका (USA) तक को झुका दिया था।
जब अमेरिका ने दी थी ‘भूखा मारने’ की धमकी
Lal Bahadur Shastri : 1965 के युद्ध के दौरान भारत न केवल सरहद पर दुश्मनों से लड़ रहा था, बल्कि देश के अंदर भारी सूखा (Drought) और खाद्य संकट (Food Crisis) से भी जूझ रहा था। उस वक्त भारत अनाज के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर था।
Lal Bahadur Shastri :अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन (Lyndon B. Johnson) ने मौके का फायदा उठाकर भारत पर दबाव बनाना चाहा। उन्होंने शास्त्री जी को खुली धमकी दी कि अगर भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध नहीं रोका, तो अमेरिका गेहूं (Wheat) की सप्लाई बंद कर देगा।
“युद्ध नहीं रुकेगा…” – शास्त्री जी का ऐतिहासिक फैसला
Lal Bahadur Shastri :अमेरिका की इस धमकी के आगे झुकने के बजाय शास्त्री जी ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने इतिहास बदल दिया। उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया— “अगर आप गेहूं देना बंद करना चाहते हैं तो कर दीजिए, लेकिन हम युद्ध नहीं रोकेंगे।”
Lal Bahadur Shastri :शास्त्री जी ने न केवल अपनी बात रखी, बल्कि देशवासियों से अपील की कि वे सप्ताह में एक दिन का उपवास (Fast) रखें ताकि अनाज की कमी को पूरा किया जा सके। उन्होंने खुद भी अपने परिवार के साथ उपवास रखा ताकि जनता को यह संदेश मिले कि देश का प्रधानमंत्री उनके साथ खड़ा है।
‘जय जवान जय किसान’ का नारा और आत्मनिर्भर भारत
Lal Bahadur Shastri :इसी संकट के बीच लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान जय किसान’ का अमर नारा दिया।
जवान: ताकि सीमाओं की रक्षा करने वाली सेना का मनोबल (Morale) ऊंचा रहे।
किसान: ताकि देश अनाज के मामले में आत्मनिर्भर (Self-reliant) बन सके और भविष्य में किसी भी देश के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
ताशकंद समझौता और रहस्यमयी मौत
Lal Bahadur Shastri :23 सितंबर 1965 को युद्ध विराम हुआ। इसके बाद सोवियत संघ की मध्यस्थता में 10 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौता (Tashkent Agreement) हुआ। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्ध से पहले वाली स्थिति में लौटने का वादा किया।
Lal Bahadur Shastri :दुख की बात यह रही कि समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटों बाद, 11 जनवरी 1966 को मात्र 61 साल की उम्र में ताशकंद में शास्त्री जी का निधन हो गया। उनकी मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है।



















