Indore Water Crisis: भागीरथपुरा में 28 मौतों का गुनहगार कौन? MP High Court में आज फिर सुनवाई, उठेंगे तीखे सवाल!

Indore Water Crisis: Indore Bhagirathpura News: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी (Contaminated Water) से मचे कोहराम के बीच आज का दिन बेहद अहम है। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं (PIL) पर आज, मंगलवार 27 जनवरी को MP High Court की इंदौर बेंच में सुनवाई होनी है।
Indore Water Crisis: जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ इस गंभीर मामले पर बहस सुनेगी। पिछली सुनवाई करीब डेढ़ घंटे चली थी, जिसमें कोर्ट ने प्रशासन और नगर निगम के दावों पर कड़े सवाल उठाए थे।
कोर्ट ने पूछा- क्या पानी में ‘जहर’ मिला था? (Key Highlights of Previous Hearing)
Indore Water Crisis: पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अजीबोगरीब तर्क दिए गए थे। शासन ने मौतों का कारण पुलिस चौकी के टॉयलेट को बताया था। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा था:
“क्या एक टॉयलेट की वजह से पानी इतना जहरीला हो सकता है कि 28 लोगों की जान चली जाए?”
“क्या इस पानी में कोई खतरनाक Chemical तो नहीं मिला है?”
“अब तक हुई मौतों का कोई ठोस और वैज्ञानिक कारण सामने क्यों नहीं आया?”
2017 की रिपोर्ट दबाकर बैठे रहे अधिकारी!
Indore Water Crisis: सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने सनसनीखेज खुलासा किया था। उन्होंने Pollution Control Board की 2017 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि प्रशासन को पहले से पता था कि शहर में E-coli और Fecal Coliform Bacteria का खतरा है। आरोप है कि अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को दबाए रखा और कोई एक्शन नहीं लिया, जिसका खामियाजा आज भागीरथपुरा के लोग भुगत रहे हैं।
ठेकेदार की लापरवाही और 28 जानें
Indore Water Crisis: रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी 2023 में ‘मालवा इंजीनियर’ नामक कंपनी को भागीरथपुरा में वाटर लाइन का काम सौंपा गया था।
Deadline: काम एक साल में पूरा होना था।
Reality: दो साल बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है।
अगर समय पर सीवरेज और नर्मदा लाइन को अलग कर दिया गया होता, तो आज 28 परिवार उजड़ने से बच जाते। अब मांग उठ रही है कि संबंधित इंजीनियर्स और ठेकेदार पर FIR दर्ज हो।
मौत के आंकड़ों पर ‘प्रशासन vs पब्लिक’
Indore Water Crisis: भागीरथपुरा में हाल ही में कांग्रेस नेता राजाराम बोरासी की भी मौत हुई है। परिजनों का आरोप है कि मौत गंदे पानी से हुई, जबकि स्वास्थ्य विभाग इसे नकार रहा है। प्रशासन केवल कुछ ही मौतों को दूषित पानी से मान रहा है, जबकि स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों का दावा है कि आंकड़ा कहीं ज्यादा बड़ा है। जीतू पटवारी समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी इस मामले में सरकार को घेरा है।



















