LIVE UPDATE
भारत

छत्तीसगढ़: धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद, तीसरी बार प्रक्रिया पर उठे सवाल

CG Paddy Procurement Tarpaulin Tender News: छत्तीसगढ़: धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद, तीसरी बार प्रक्रिया पर उठे सवाल, छत्तीसगढ़ में धान के सुरक्षित रखरखाव को लेकर मार्कफेड (MARKFED) द्वारा की जा रही तिरपाल (कैप कवर) की खरीदी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विभाग ने तीसरी बार टेंडर जारी किया है, लेकिन शर्तों को लेकर आपत्तियां अभी भी बरकरार हैं। शिकायतों के बाद भी नियमों में बदलाव न होने से स्थानीय सप्लायर्स में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

मार्कफेड की शर्तों ने खड़ा किया नया विवाद

धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद,धान खरीदी केंद्रों में अनाज को बारिश और नमी से बचाने के लिए ब्लैक पॉलिथीन कैप कवर (तिरपाल) की आवश्यकता होती है। इसके लिए 29 जनवरी को ‘जेम पोर्टल’ (GeM Portal) के माध्यम से लगभग 24,000 कैप कवर की खरीदी हेतु निविदा जारी की गई। स्थानीय छत्तीसगढ़ी सप्लायर्स का सीधा आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं जिससे केवल बाहरी राज्यों की बड़ी कंपनियों को ही लाभ मिल सके।

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

टर्नओवर की शर्त: स्थानीय व्यापारियों की राह में रोड़ा

धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद,इस बार टेंडर में एलडीपीई (LDPE) फिल्म से बने कैप कवर की आपूर्ति के लिए 5.75 करोड़ रुपये का टर्नओवर मांगा गया है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से राज्य में टेंडर प्रक्रिया न होने के कारण स्थानीय फर्मों का टर्नओवर कम है, जिससे वे इस प्रक्रिया से अपने आप बाहर हो रही हैं। पूर्व में भी ऐसी ही शर्तों के कारण मुख्यमंत्री कार्यालय और कृषि मंत्री तक शिकायतें पहुंची थीं।

टेंडर प्रक्रिया: बार-बार निरस्त होने का पूरा घटनाक्रम

धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद,तिरपाल खरीदी के लिए विभाग की कवायद काफी समय से चल रही है, लेकिन पारदर्शिता की कमी के कारण यह बार-बार अटक रही है:

  1. पहली कोशिश: 30 सितंबर को जारी टेंडर में 6.25 करोड़ का टर्नओवर मांगा गया था। विवाद बढ़ा तो इसे घटाकर 5.75 करोड़ किया गया और अंत में निरस्त कर दिया गया।

  2. दूसरी कोशिश: 18 नवंबर को 4.50 करोड़ के टर्नओवर के साथ नई निविदा बुलाई गई, लेकिन आपत्तियों के चलते इसे भी रद्द करना पड़ा।

  3. तीसरी कोशिश: अब 29 जनवरी को दोबारा जारी टेंडर में फिर वही पुरानी शर्तें थोप दी गई हैं, जिन्हें लेकर पहले से ही विरोध हो रहा था।

महंगे दामों पर खरीदी: अन्य राज्यों की तुलना में भारी अंतर

धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद,पिछली खरीदी के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में तिरपाल की खरीदी अन्य राज्यों के मुकाबले काफी महंगी हुई है। वर्ष 2024-25 में मार्कफेड ने जेम पोर्टल के जरिए 12,685 रुपये प्रति नग की दर से तिरपाल खरीदे थे। इसके विपरीत, तमिलनाडु सरकार ने इसी गुणवत्ता के कैप कवर मात्र 9,390 रुपये से 9,580 रुपये के बीच खरीदे हैं। सवाल यह उठता है कि जब उसी गुणवत्ता का माल कम दाम पर उपलब्ध है, तो छत्तीसगढ़ में अधिक भुगतान क्यों किया जा रहा है?

साठगांठ और भ्रष्टाचार की आशंका

धान खरीदी के लिए तिरपाल टेंडर में फिर बढ़ा विवाद,पिछले टेंडरों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ चुनिंदा फर्मों ने मिलकर सिंडिकेट की तरह काम किया। एक समान रेट भरकर टेंडर को आपस में बांटने के आरोप भी लग चुके हैं। स्थानीय सप्लायर्स का मानना है कि यदि टर्नओवर की शर्तों में ढील दी जाए, तो राज्य की फर्मों को काम मिलेगा और सरकारी खजाने को भी बचत होगी।

Pooja Chandrakar

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है। इसकी प्रतिबद्ध ऑनलाइन संपादकीय टीम हर रोज विशेष और विस्तृत कंटेंट देती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE