भारत-फ्रांस शिखर सम्मेलन 2026: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भव्य स्वागत, जानें क्यों खास है यह दौरा

India-France Relations 2026: भारत-फ्रांस शिखर सम्मेलन 2026: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भव्य स्वागत, जानें क्यों खास है यह दौरा, भारत और फ्रांस की दोस्ती एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुँच रहे हैं। इस ऐतिहासिक दौरे का आगाज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस गर्मजोशी भरे संदेश के साथ हुआ, जिसने दोनों देशों के बीच की गहरी साझेदारी को दुनिया के सामने फिर से प्रदर्शित किया है।
पीएम मोदी ने किया ‘एक्स’ (Twitter) पर आत्मीय स्वागत
भारत-फ्रांस शिखर सम्मेलन 2026:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत करते हुए दोनों देशों के अटूट रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने लिखा:
“भारत में आपका हार्दिक स्वागत है! आपकी यह यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में ले जाएगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे बीच होने वाली चर्चाओं से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और अधिक मजबूत होगा, जो न केवल हमारे देशों के लिए बल्कि वैश्विक प्रगति के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। मुंबई और दिल्ली में आपसे मुलाकात का इंतजार रहेगा, मेरे प्रिय मित्र इमैनुएल मैक्रों।”
राष्ट्रपति मैक्रों का संदेश: मुंबई से दिल्ली तक की रणनीतिक यात्रा
भारत-फ्रांस शिखर सम्मेलन 2026:अपनी यात्रा को लेकर उत्साहित राष्ट्रपति मैक्रों ने भी भारतीय जनता और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तीन दिवसीय दौरा मुंबई से शुरू होकर नई दिल्ली तक जाएगा। मैक्रों ने अपनी पोस्ट में कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) को और अधिक विस्तार देना है। उन्होंने भारत के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और आपसी सहयोग को नई दिशा देने की बात कही।
भारत-फ्रांस संबंधों के प्रमुख स्तंभ: रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक
भारत-फ्रांस शिखर सम्मेलन 2026:विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे कूटनीतिक और आर्थिक निहितार्थ हैं। इन क्षेत्रों में बड़े समझौतों की उम्मीद है:
रक्षा क्षेत्र (Defense Sector): भारत और फ्रांस के बीच राफेल और स्कॉर्पीन पनडुब्बी जैसे बड़े रक्षा सौदों के बाद अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत नई तकनीक के हस्तांतरण पर चर्चा हो सकती है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत और फ्रांस की नौसैनिक साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंतरिक्ष और ऊर्जा: इसरो (ISRO) और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच साझा मिशनों और हरित ऊर्जा (Green Energy) क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार और तकनीक: डिजिटल अर्थव्यवस्था, एआई (AI) और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं।
व्यक्तिगत केमिस्ट्री और वैश्विक प्रभाव
भारत-फ्रांस शिखर सम्मेलन 2026:प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच की निजी मित्रता अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा का विषय रहती है। दोनों नेताओं की यह ‘केमिस्ट्री’ अक्सर जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति बनाने में मदद करती है। 2026 का यह दौरा न केवल भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को बढ़ाएगा बल्कि यूरोप में भारत के सबसे भरोसेमंद साथी के रूप में फ्रांस की स्थिति को और मजबूत करेगा।



















