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Health Department Negligence: System की भयंकर लापरवाही: जिंदा शख्स को कागजों में किया ‘Dead’ घोषित! राशन से लेकर बैंक अकाउंट तक सब हुए बंद

Health Department Negligence: कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही! समाजसेवी गौरव शाहू को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। अब आधार, बैंक और राशन सब बंद है। जानिए पूरा मामला।

Health Department Negligence in Kanpur: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप जीवित हैं, अपने पैरों पर चल रहे हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में आपको ‘मृत’ (Dead) घोषित कर दिया गया हो? कानपुर में एक समाजसेवी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। Health Department की एक लापरवाही ने एक हंसते-खेलते इंसान की पहचान ही छीन ली। अब आलम यह है कि उनका राशन कार्ड, बैंक अकाउंट और आधार कार्ड—सब कुछ अमान्य (Invalid) हो चुका है।

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कैसे शुरू हुई यह मुसीबत? (The Backstory)

Health Department Negligence: कानपुर के गोविंद नगर के रहने वाले गौरव शाहू एक समाजसेवी हैं। उनका काम लावारिस मरीजों की मदद करना और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करना है।

  • सितंबर 2025 की घटना: गौरव ने एक लावारिस मरीज को मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।

  • अस्पताल की गलती: 12 सितंबर 2025 को उस मरीज की मौत हो गई। अस्पताल के स्टाफ ने लापरवाही की हद पार करते हुए मृत मरीज की जगह, गौरव शाहू (जिन्होंने मरीज को भर्ती कराया था) के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर उन्हें ही मृत घोषित कर दिया।

  • सबसे बड़ी विडंबना (Irony): जिस ‘मृत’ व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट जारी हुआ, उसी गौरव शाहू ने उस लावारिस शव का अंतिम संस्कार भी किया।

Identity Crisis: जब राशन से लेकर बैंक तक सब बंद हो गया

Health Department Negligence: इस भयंकर गलती का पता गौरव को जनवरी 2026 में चला, जब वह सरकारी राशन लेने पहुंचे। कोटेदार ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि “रिकॉर्ड में तो आप मर चुके हैं।”

धीरे-धीरे गौरव की पूरी ‘डिजिटल लाइफ’ तबाह हो गई:

  1. Ration Card: लिस्ट से नाम हट गया।

  2. Bank Account: खाता पूरी तरह ब्लॉक हो गया।

  3. Aadhaar Card: बायोमेट्रिक्स और पहचान इनवैलिड दिखने लगी।

  4. DL & PAN: ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड भी अमान्य (Invalid) हो गए।

“यह हमारे बस का नहीं है”—System का ठंडा जवाब

Health Department Negligence: जब गौरव ने अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया और अपनी पहचान साबित करने की कोशिश की, तो उन्हें जिम्मेदार अधिकारियों से कोई मदद नहीं मिली। उल्टा उन्हें यह कह दिया गया कि “अब यह हमारे बस में नहीं है।”

Health Department Negligence: आज गौरव शाहू खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। वह स्वास्थ्य विभाग (Health Department) से लेकर नगर निगम तक हर दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन कागजों की भूलभुलैया से निकल नहीं पा रहे हैं।

CMO का एक्शन: क्या वापस मिलेगी पहचान?

Health Department Negligence: इस मामले के मीडिया में आने के बाद CMO कानपुर ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और गौरव के दस्तावेजों में सुधार किया जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या डिजिटल इंडिया के दौर में एक आम आदमी को खुद के जिंदा होने का सबूत देने के लिए इतना संघर्ष करना पड़ेगा?

Dr. Tarachand Chandrakar

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