
रायपुर: छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद: 2225 करोड़ की सड़कों के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप, पीएम मोदी तक पहुंची शिकायत, छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के तहत होने वाले निर्माण कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के नक्सल प्रभावित और आदिवासी क्षेत्रों में सड़कों के जाल बिछाने के लिए प्रस्तावित 2225 करोड़ रुपये के टेंडर पर नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से की है।
क्या है 2225 करोड़ का यह पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद:केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 24 जिलों में लगभग 774 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य 100 से अधिक आबादी वाले उन गांवों को बारामासी सड़कों से जोड़ना है, जो अब तक पहुंच विहीन हैं। छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (CGRRDA) द्वारा इसके लिए 105 ग्रुप/पैकेज बनाकर निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की गई हैं।
नियमों में फेरबदल और ‘खेल’ के आरोप
छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद:शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य अभियंता के.के. कटारे द्वारा जारी इन निविदाओं में केंद्र सरकार के मानक नियमों (Standard Bidding Document) को दरकिनार किया गया है। प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:
निविदा शर्तों में बार-बार बदलाव: टेंडर की शर्तों में तीन बार संशोधन किया गया है, जो संदेह पैदा करता है।
अंतिम तिथि में गड़बड़ी: बिना किसी ठोस कारण के आवेदन की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 और शपथ पत्र की तारीख 2 फरवरी 2026 कर दी गई।
शपथ पत्र के लिए कम समय: नियमानुसार ठेकेदारों को ऑफलाइन दस्तावेज जमा करने के लिए 3 दिन मिलने चाहिए, जिसे घटाकर केवल 1-2 दिन कर दिया गया।
डामर प्लांट की शर्त: डामर प्लांट के लिए निर्माण क्षेत्र से 90 किमी का दायरा तय कर दिया गया है, जो कई ठेकेदारों को प्रक्रिया से बाहर करने की रणनीति बताई जा रही है।
चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने की कोशिश?
छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद:आरोपों के अनुसार, सड़कों के छोटे-छोटे पैकेजों को जोड़कर 30 से 40 करोड़ रुपये के बड़े पैकेज बनाए गए हैं। ऐसा कथित तौर पर इसलिए किया गया है ताकि छोटे स्थानीय ठेकेदार इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएं और केवल ‘पसंदीदा’ बड़े ठेकेदारों को ही काम मिल सके। इसके अलावा, एलडब्ल्यूई (LWE) प्रभावित जिलों के लिए सुरक्षा निधि के नियमों में भी मनमाने बदलाव किए गए हैं।
जांच के घेरे में मुख्य अभियंता
छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद:शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्य अभियंता के.के. कटारे के खिलाफ पहले से ही ईओडब्ल्यू (EOW), एसीबी (ACB) और लोकायोग में मामले लंबित हैं। ऐसे में उनके द्वारा निविदा प्रक्रिया का संचालन करने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मांग की गई है कि वर्तमान निविदा को तत्काल निरस्त किया जाए और केंद्रीय नियमों के आधार पर नई निविदा जारी की जाए।
विभाग का पक्ष: आरोपों को नकारा
छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद:इन आरोपों पर सफाई देते हुए मुख्य अभियंता के.के. कटारे ने कहा है कि निविदा प्रक्रिया में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कार्य केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुरूप किए जा रहे हैं और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा गया है।
और कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ PMGSY निविदा विवाद:इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारी को पद से हटाकर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह राज्य के बुनियादी ढांचा विकास के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।



















