
Delhi High Court Verdict: ब्रेकअप को ‘खुदकुशी के लिए उकसाना’ नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि आधुनिक समाज में प्रेम संबंधों का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी रिश्ते के खत्म होने या ब्रेकअप होने को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत ‘आत्महत्या के लिए उकसाना’ (Abetment of Suicide) नहीं कहा जा सकता।
रिश्तों का टूटना और कानूनी जवाबदेही: कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
ब्रेकअप को ‘खुदकुशी के लिए उकसाना’ नहीं माना जा सकता:न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि हर ब्रेकअप के लिए पूर्व साथी को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत के अनुसार, आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप तभी सिद्ध होता है जब आरोपी का कृत्य ऐसा हो कि पीड़ित के पास अपना जीवन समाप्त करने के अलावा कोई अन्य विकल्प न बचा हो।
क्या है पूरा मामला? (Case Background)
ब्रेकअप को ‘खुदकुशी के लिए उकसाना’ नहीं माना जा सकता:यह मामला एक 27 वर्षीय युवती से जुड़ा है, जिसने अक्टूबर 2025 में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। युवती के परिजनों ने नूर मोहम्मद नामक युवक पर गंभीर आरोप लगाए थे। पिता का दावा था कि युवक ने शादी के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया था, जिससे तंग आकर उनकी बेटी ने यह कदम उठाया। पुलिस ने इन आरोपों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
8 साल का रिश्ता और शादी के बाद की घटना
ब्रेकअप को ‘खुदकुशी के लिए उकसाना’ नहीं माना जा सकता:सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच लगभग आठ साल से प्रेम संबंध थे। अलग-अलग धर्म होने के कारण परिवार इस शादी के लिए तैयार नहीं थे, जिसके चलते दोनों अलग हो गए। युवक ने दूसरी जगह शादी कर ली और उसकी शादी के महज पांच दिन बाद युवती ने आत्महत्या कर ली। आरोपी ने स्पष्ट किया कि उसकी ओर से युवती पर कोई दबाव नहीं था।
साक्ष्यों की कमी और डायरी का रहस्य
ब्रेकअप को ‘खुदकुशी के लिए उकसाना’ नहीं माना जा सकता:अदालत ने मामले की बारीकी से जांच की और पाया कि:
कोई सुसाइड नोट नहीं: युवती ने मरने से पहले कोई पत्र नहीं छोड़ा जिसमें युवक को जिम्मेदार ठहराया गया हो।
डायरी में दबाव का जिक्र नहीं: युवती की निजी डायरी में युवक के प्रति प्रेम और शादी की इच्छा तो थी, लेकिन कहीं भी धर्म परिवर्तन या प्रताड़ना का उल्लेख नहीं था।
दोस्तों के बयान: युवती के मित्रों ने बताया कि वह ब्रेकअप और युवक की दूसरी शादी से दुखी थी, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह के दबाव की बात नहीं कही।
अदालत का अंतिम निर्णय: आरोपी को मिली जमानत
ब्रेकअप को ‘खुदकुशी के लिए उकसाना’ नहीं माना जा सकता:कोर्ट ने गौर किया कि युवती की मृत्यु और युवक से आखिरी बातचीत के बीच काफी समय का अंतराल था। अदालत ने माना कि यह एक भावनात्मक टूटने (Emotional Breakdown) का मामला हो सकता है, जहां युवती अपने साथी को किसी और के साथ देखकर सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई। इन तथ्यों के आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी और कहा कि प्रथम दृष्टया ‘उकसाने’ का कोई ठोस सबूत नहीं मिलता।



















