
छत्तीसगढ़ न्यूज़: छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरु-शिष्य परंपरा शर्मसार: मोबाइल मिलने पर शिक्षकों ने छात्रों को बेरहमी से पीटा, प्राइवेट पार्ट पर मारी लात, दुर्ग जिले के बोरई स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ अनुशासन के नाम पर दो शिक्षकों ने छात्रों के साथ ऐसी क्रूरता की, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। केवल मोबाइल फोन रखने के आरोप में 10वीं और 12वीं के छात्रों को लाठी-डंडों, लात और घूंसों से बुरी तरह पीटा गया।
मोबाइल लाने की मिली अमानवीय सजा
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरु-शिष्य परंपरा शर्मसार: जवाहर नवोदय विद्यालय एक आवासीय स्कूल है, जहाँ नियमों के मुताबिक मोबाइल लाना प्रतिबंधित है। बताया जा रहा है कि 21 फरवरी को कुछ छात्रों के पास मोबाइल फोन पाए गए थे। इस बात से नाराज होकर शिक्षकों ने छात्रों को पहले वाइस प्रिंसिपल के केबिन में बुलाया और फिर उन पर बेरहमी से टूट पड़े।
घायल छात्रों की हालत देख कांप उठी रूह
पीड़ित छात्रों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि मारपीट इतनी हिंसक थी कि:
एक छात्र के कान से खून बहने लगा।
एक छात्र की आंखें अंदरूनी चोट के कारण लाल हो गई हैं।
सबसे हैरान करने वाला आरोप यह है कि पीटी टीचर ने एक छात्र के प्राइवेट पार्ट पर जूते से लात मारी, जिससे उसे गंभीर सूजन और असहनीय दर्द की शिकायत है।
CCTV में कैद हुई शिक्षकों की हैवानियत
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरु-शिष्य परंपरा शर्मसार: यह पूरी घटना स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। जब पीड़ित छात्र 24 फरवरी को अपने परिजनों के साथ पुलगांव थाना पहुँचे, तो पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फुटेज की जांच की। हालांकि वीडियो को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसके आधार पर पुलिस ने ठोस कार्रवाई की है।
आरोपी शिक्षक गिरफ्तार और सस्पेंड
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरु-शिष्य परंपरा शर्मसार: पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक पीयूष कुमार और पीटी टीचर रविशंकर मंडलोई को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरु-शिष्य परंपरा शर्मसार: छात्रों के परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने इस घटना के बारे में स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने शुरू में जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन बच्चों की हालत बिगड़ने पर मामला पुलिस तक पहुँचा।
निष्कर्ष: अनुशासन या प्रताड़ना?
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरु-शिष्य परंपरा शर्मसार: स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन अनुशासन के नाम पर बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना और उन्हें गंभीर चोट पहुँचाना कानूनन अपराध है। दुर्ग की इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



















