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RGHS योजना में करोड़ों की सेंध, SOG ने डॉक्टर और लैब संचालक को किया गिरफ्तार

RGHS योजना में करोड़ों की सेंध,राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना, RGHS (Rajasthan Government Health Scheme), में एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जयपुर स्थित स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस घोटाले का पर्दाफाश करते हुए एक सरकारी डॉक्टर और एक निजी लैब संचालक को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने आपसी मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर राज्य सरकार के खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है।

SOG की बड़ी कार्रवाई: दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, RGHS के क्रियान्वयन में हो रही अनियमितताओं की जांच के दौरान इस बड़े खेल का पता चला। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है:

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  1. डॉ. कमल कुमार अग्रवाल: सीकर के एसके (SK) अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ (एसोसिएट प्रोफेसर)।

  2. डॉ. बनवारी लाल (बी. लाल): सीकर में एक निजी डायग्नोस्टिक लैब के संचालक।

धोखाधड़ी का तरीका: फर्जी पर्चे और जाली रिपोर्ट्स

जांच में सामने आया कि यह घोटाला बेहद शातिराना तरीके से किया जा रहा था। आरोपियों ने सांठगांठ कर निम्नलिखित तरीकों से सरकारी पैसे की चोरी की:

  • अनावश्यक जांचें: मरीजों की अनुपस्थिति या बिना जांच किए ही महंगे डायग्नोस्टिक टेस्ट, जैसे MRI स्कैन, लिख दिए जाते थे।

  • बिलिंग में हेरफेर: सामान्य MRI जांच को “कॉन्ट्रास्ट MRI” (जो अधिक महंगी होती है) के रूप में बिल किया जाता था ताकि सरकार से ज्यादा पैसा वसूला जा सके।

  • बैक-डेटेड एंट्री: कई बार उन तारीखों में पर्चे जारी किए गए जब संबंधित डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी पर ही नहीं थे।

  • फर्जी रिपोर्टिंग: एक ही जांच के नाम पर कई फर्जी रिपोर्ट तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की गई और बार-बार भुगतान का दावा किया गया।

मरीज कहीं और, बिल कहीं और

RGHS योजना में करोड़ों की सेंध,जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया जहां एक मरीज किसी अन्य अस्पताल में भर्ती था, लेकिन उसके नाम पर RGHS के तहत जांच के दावे पेश कर दिए गए। एक अन्य मामले में, 4 दिसंबर की रिपोर्ट को बदलकर 5 दिसंबर कर दिया गया ताकि तकनीकी रूप से भुगतान प्राप्त किया जा सके, जबकि उस दिन मरीज शहर में मौजूद ही नहीं था।

असली लाभार्थियों पर संकट

SOG अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के घोटालों से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि योजना की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ती है। फर्जी दावों के कारण संसाधनों की कमी होती है, जिसका सीधा असर उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है जिन्हें वास्तव में इलाज की आवश्यकता है।

जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद

RGHS योजना में करोड़ों की सेंध,स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। SOG अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस रैकेट में अन्य डॉक्टर, अस्पताल कर्मचारी या लैब ऑपरेटर भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

RGHS योजना में करोड़ों की सेंध, RGHS घोटाला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब डिजिटल पोर्टल की सुरक्षा और ऑडिटिंग को और कड़ा किए जाने की मांग उठ रही है।

Pooja Chandrakar

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