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सूचना आयुक्त की नियुक्ति में होनी चाहिए पारदर्शिता, रिटायर्ड नौकरशाह ही न भरे जाएं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र एवं राज्य के सूचना आयोगों में खाली पदों पर छह महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया हो जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्रीय सूचना आयुक्त का दर्जा केंद्रीय चुनाव आयुक्त के बराबर होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता बरतने के लिए दायर याचिका पर निर्देश देते हुए कहा कि केंद्र एवं राज्य के सूचना आयोगों में खाली पदों कि छह महीने के भीतर सभी खाली पदों पर भर्तियां प्रक्रिया हो जानी चाहिए।
सूचना आयुक्त की नियुक्ति में होनी चाहिए पारदर्शिता, रिटायर्ड नौकरशाह ही न भरे जाएं : सुप्रीम कोर्ट

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केन्द्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोग, सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत जानकारी पाने के लिए शीर्ष अपीलीय संस्था है। केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में केंद्रीय सूचना आयोग में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की है और चारों लोग रिटायर्ड सरकारी बाबू हैं।

इस बात को लेकर मोदी सरकार की जगह जगह आलोचना हो रही है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘सूचना आयोग रिटायर्ड नौकरशाहों के लिए नहीं बना है। विभिन्न क्षेत्रों के टैलेंटेड और अनुभवी लोगों को सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए।’

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में उच्च स्तर की पारदर्शिता भी सुनिश्चित करने की बात कही है। लाइव लॉ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए सर्च कमेटी की गाइडलाइन सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सूचना आयुक्त के पद के लिए आए सभी आवेदकों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। ये सारी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड कर सार्वजनिक की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग का स्थान केंद्रीय चुनाव आयोग के बराबर होना चाहिए। इसके साथ ही केंद्रीय सूचना आयुक्त का दर्जा केंद्रीय चुनाव आयुक्त के बराबर होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सूचना आयोगों को सीधे सरकारी (कार्यकारी) नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए। कोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज, कोमोडोर लोकेश बत्रा और अमृता जौहरी द्वारा दायर याचिका पर ये निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सूचना आयोगों में अपीलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जिसके चलते पेंडेंसी बढ़ती जा रही है।लेकिन केंद्र और राज्य सरकार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं कर रही है।

इसके अलावा ये भी आरोप था कि सरकार द्वारा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आरटीआई कानून को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी कदम के रूप में देखा जा रहा है। जिससे आरटीआई एक्टिविस्ट के मन में खुशी की लहर है।

Nidar Chhattisgarh Desk

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