आस्था और कला का संगम: गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार, मिट्टी की मूर्तियों की धूम

आस्था और कला का संगम: गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार, मिट्टी की मूर्तियों की धूम
रायपुर: गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार, जैसे-जैसे गणेश चतुर्थी का महापर्व नजदीक आ रहा है, छत्तीसगढ़ की गलियों और कलाकारों की कार्यशालाओं में एक खास रौनक और उमंग देखने को मिल रही है। घर-घर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और मूर्तिकार दिन-रात एक कर आस्था को मिट्टी में ढालकर मनमोहक मूर्तियों को आकार दे रहे हैं।
मिट्टी में ढल रही आस्था, हर मूर्ति में एक कहानी
शहर के कोने-कोने में, कलाकारों के सधे हुए हाथ मिट्टी को भगवान गणेश के विभिन्न रूपों में ढाल रहे हैं। कहीं बाल गणेश की नटखट छवि उभर रही है, तो कहीं सिंहासन पर विराजे गणपति का भव्य रूप। इन मूर्तियों को बनाने की प्रक्रिया कई सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है, जिसमें मिट्टी को तैयार करने से लेकर मूर्ति को गढ़ने, सुखाने और फिर उस पर प्राकृतिक रंगों से आकर्षक चित्रकारी करने तक की मेहनत शामिल है।गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार
क्यों पहली पसंद बनीं मिट्टी की मूर्तियां?
पिछले कुछ वर्षों में, पर्यावरण के प्रति बढ़ी जागरूकता ने भक्तों की पसंद को भी बदला है। अब प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों की जगह पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों की मांग में भारी उछाल आया है।गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार
पर्यावरण की सुरक्षा: मिट्टी की मूर्तियां विसर्जन के बाद पानी में आसानी से घुल जाती हैं और नदियों-तालाबों को प्रदूषित नहीं करतीं।
कला को बढ़ावा: यह पारंपरिक कला को जीवित रखने और स्थानीय कलाकारों को रोजगार देने का भी एक बड़ा माध्यम है।
शास्त्रों के अनुरूप: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी पूजा के लिए मिट्टी की प्रतिमा को ही सबसे शुद्ध और शुभ माना जाता है।
कलाकारों की जुबानी: यह सिर्फ काम नहीं, साधना है
एक मूर्तिकार ने बताया, “हमारे लिए यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि साल भर का इंतजार और एक साधना है। जब हम मिट्टी को छूते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हम सीधे ईश्वर से जुड़ रहे हैं। हर मूर्ति के साथ हमारी श्रद्धा और भावनाएं जुड़ी होती हैं।” कलाकार बताते हैं कि इस बार भी छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा है, जिन्हें लोग अपने घरों में स्थापित करते हैं।गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार
गणेश चतुर्थी का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह कला, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का एक खूबसूरत संगम भी प्रस्तुत करता है, जिसकी तैयारियों की धूम अभी से पूरे छत्तीसगढ़ में दिखाई दे रही है।गणेश चतुर्थी के लिए सजने लगे छत्तीसगढ़ के बाजार



















