
एक गुल्लक बदलेगा स्कूल की तस्वीर! धमतरी के बच्चे खुद संवारेंगे अपना भविष्य, 4 लाख जुटाकर बनाएंगे स्मार्ट कंप्यूटर लैब
एक गुल्लक बदलेगा स्कूल की तस्वीर! धमतरी के बच्चे खुद संवारेंगे अपना भविष्य, कौन कहता है कि बड़े बदलाव के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है? कभी-कभी एक छोटा सा गुल्लक भी क्रांति ला सकता है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक शिक्षक दंपत्ति की अनूठी पहल ने बच्चों में बचत और आत्मनिर्भरता की ऐसी अलख जगाई है, जिसकी तारीफ खुद जिले के कलेक्टर भी कर रहे हैं। इस पहल का नाम है- ‘मैं हूं गुल्लक’ मिशन।
बच्चों की शपथ: ‘हम खुद बनाएंगे अपना कंप्यूटर लैब’
इस मिशन की सबसे प्रेरणादायक बात है बच्चों का संकल्प। धमतरी के सेजेस सिंगपुर विद्यालय के बच्चों ने गुल्लक मिलते ही खुशी से एक शपथ ली है। उन्होंने प्रण लिया है कि वे अपनी बचत से 4 लाख रुपये का फंड इकट्ठा करेंगे और आगामी 26 जनवरी को अपने स्कूल को एक आधुनिक कंप्यूटर लैब तोहफे में देंगे। उनका सपना है कि वे अपनी मेहनत से स्कूल को स्मार्ट और मॉडर्न बनाएं, जहां वे नई तकनीक सीख सकें और अपनी तकदीर बदल सकें।एक गुल्लक बदलेगा स्कूल की तस्वीर! धमतरी के बच्चे खुद संवारेंगे अपना भविष्य
‘मैं हूं गुल्लक’ मिशन: एक शिक्षक दंपत्ति की अनोखी सोच
इस अद्भुत पहल के पीछे शिक्षक दंपत्ति रंजीता साहू और टुमनचंद साहू की सोच है। उनका मानना है कि “बचत से ही बदलाव संभव है।” वे बच्चों को सिखा रहे हैं कि कैसे छोटी-छोटी बचत करके वे अपनी शिक्षा में निवेश कर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। वे स्कूलों में बच्चों और संस्थानों को गुल्लक भेंट कर बचत के साथ-साथ संस्कार की भी शिक्षा एक गुल्लक बदलेगा स्कूल की तस्वीर! धमतरी के बच्चे खुद संवारेंगे अपना भविष्यदे रहे हैं। इस अनोखी पहल की सराहना करते हुए धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने भी साहू दंपत्ति के प्रयासों की प्रशंसा की है।
प्रेरणा की पहली चिंगारी: अपनी ही बेटियों से मिला आइडिया
साहू दंपत्ति को यह प्रेरणा अपनी ही तीन बेटियों- खुशिका, गरिमा और झलक से मिली। उनकी बेटियों ने अपनी गुल्लक में जमा किए पैसे दान कर दिए थे। इतनी छोटी उम्र में दिए गए इस बड़े संदेश ने उन्हें इस मिशन को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया।एक गुल्लक बदलेगा स्कूल की तस्वीर! धमतरी के बच्चे खुद संवारेंगे अपना भविष्य
सिर्फ बचत नहीं, आत्मनिर्भरता और संस्कार की शिक्षा
स्कूल के प्राचार्य डॉ. वी.पी. चंद्रा ने इस गुल्लक योजना को एक “बहु-आयामी मिशन” बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पैसा जमा करना नहीं है, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने, उनमें जिम्मेदारी की भावना जगाने और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का एक माध्यम है। साहू दंपत्ति को विश्वास है कि यहां के समर्पित शिक्षकों, जागरूक पालकों और मेहनती बच्चों के सहयोग से यह मिशन जरूर कामयाब होगा और यह स्कूल पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बनेगा।एक गुल्लक बदलेगा स्कूल की तस्वीर! धमतरी के बच्चे खुद संवारेंगे अपना भविष्य



















