गौरेला पेंड्रा मरवाही: छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने राज्य की स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 43 वर्षीय भगवतिया बाई बैगा नामक महिला ने असहनीय पेट दर्द से तंग आकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इलाज के दौरान जिला अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन दुखद बात यह है कि उनके पति को अपनी पत्नी के शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध नहीं हो सका।
असहनीय दर्द ने ली जान:
जानकारी के मुताबिक, भगवतिया बाई पिछले कुछ दिनों से पेट दर्द की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। बीते दिन, दर्द इतना असहनीय हो गया कि उन्होंने जहर का सेवन कर लिया। उनके पति सुखसेन ने आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन दुर्भाग्यवश, अस्पताल में भगवतिया बाई की मौत हो गई। यह पूरा मामला बैगा बाहुल्य ग्राम आमाडोब का है, जहां एक आदिवासी परिवार को इस त्रासदी का सामना करना पड़ा।
शव वाहन न मिलने से बढ़ी परेशानी:
इस घटना का एक और दुखद पहलू यह रहा कि, अस्पताल में पत्नी की मृत्यु के बाद सुखसेन को अपनी पत्नी के शव को घर ले जाने के लिए घंटों तक संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि उन्हें कोई सरकारी शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। घंटों की परेशानी और इंतजार के बाद, सुखसेन को मजबूरन एक निजी एंबुलेंस किराए पर लेनी पड़ी, जिसके लिए उन्हें 3300 रुपये का भारी भुगतान करना पड़ा।
सरकारी अव्यवस्था पर गंभीर सवाल:
यह घटना शासन की उन तमाम योजनाओं पर सवाल उठाती है, जो विशेष रूप से बैगा आदिवासी समुदाय के उत्थान और कल्याण के लिए चलाई जा रही हैं। एक ओर जहां सरकार आदिवासी कल्याण और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक बैगा परिवार को शव वाहन जैसी मूलभूत सुविधा न मिलना व्यवस्था की गहरी खामियों और लापरवाही को उजागर करता है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
बलौदाबाजार में भी आत्महत्या का मामला:
इसी बीच, 7 अगस्त को बलौदाबाजार जिले से भी एक महिला द्वारा जहरीला पदार्थ सेवन कर खुदकुशी किए जाने का मामला सामने आया था। मृतका की पहचान अंजनी यादव (32 वर्ष) पति नरेंद्र यादव के रूप में हुई है। यह पूरा मामला पलारी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम दतरेगी का है। जानकारी के अनुसार, अंजनी ने बुधवार को अज्ञात जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था, जब घर में कोई नहीं था। परिजन उसे गंभीर अवस्था में पलारी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जीरो में मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। इन घटनाओं ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आप एक दिल को छू लेने वाली तस्वीर देख सकते हैं, जिसमें एक एम्बुलेंस एक ग्रामीण क्षेत्र से गुजर रही है, जो सरकारी शव वाहनों की अनुपलब्धता के कारण एक परिवार की पीड़ा को उजागर करती है, जिसने अपने प्रियजन को खो दिया है।