रेलवे कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी: ड्यूटी पर ‘रीलबाजी’ की तो जाएगी नौकरी! बोर्ड ने जारी किया सख्त आदेश

रेलवे कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी: ड्यूटी पर ‘रीलबाजी’ की तो जाएगी नौकरी! बोर्ड ने जारी किया सख्त आदेश. भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अपने कर्मचारियों के लिए अनुशासन और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अगर आप रेलवे कर्मचारी हैं और ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के लिए रील (Reels) या वीडियो बनाने के शौकीन हैं, तो अब सावधान हो जाइए। रेलवे बोर्ड ने ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह की वीडियोग्राफी या सोशल मीडिया गतिविधि पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
अब ड्यूटी के वक्त ‘एंटरटेनमेंट’ नहीं चलेगा
बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर रेलवे कर्मचारियों, खासकर लोको पायलट और गार्ड्स के कई वीडियो वायरल हो रहे थे। कई कर्मचारी व्लॉगिंग (Vlogging) करते या रील बनाते हुए नजर आए। रेलवे बोर्ड ने माना है कि इससे न केवल कर्मचारियों का ध्यान भटकता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। इसी को देखते हुए अब ड्यूटी ऑवर्स में मोबाइल पर निजी मनोरंजन या कंटेंट क्रिएशन पर रोक लगा दी गई है।रेलवे कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी: ड्यूटी पर ‘रीलबाजी’ की तो जाएगी नौकरी!
इन जगहों पर वीडियो बनाया तो खैर नहीं
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध सिर्फ ट्रेन के अंदर ही नहीं, बल्कि रेलवे परिसर के कई संवेदनशील हिस्सों पर लागू होगा। आदेश के मुताबिक, कर्मचारी अब निम्नलिखित जगहों पर वीडियो नहीं बना सकेंगे:
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ट्रेन के इंजन या कोच के अंदर
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रेलवे स्टेशन परिसर
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कंट्रोल रूम
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रेलवे यार्ड
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सिग्नल केबिन
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कोई भी अन्य संवेदनशील स्थान
बोर्ड का कहना है कि इन जगहों के वीडियो वायरल होने से रेलवे के ऑपरेशन से जुड़ी गोपनीय और संवेदनशील जानकारी लीक होने का खतरा बना रहता है।रेलवे कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी: ड्यूटी पर ‘रीलबाजी’ की तो जाएगी नौकरी!
नियम तोड़ने पर मिलेगी ये कड़ी सजा
रेलवे ने साफ कर दिया है कि यह आदेश कोई सलाह नहीं, बल्कि चेतावनी है। अगर कोई कर्मचारी इन नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया, तो उस पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। सजा के तौर पर ये कदम उठाए जा सकते हैं:
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सस्पेंशन (Suspension): तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबन।
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चार्जशीट: विभागीय जांच बिठाई जाएगी।
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वेतन में कटौती: सैलरी काटी जा सकती है।
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सर्विस रिकॉर्ड खराब: कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड में निगेटिव रिमार्क दर्ज होगा, जिससे प्रमोशन में दिक्कत आ सकती है।
सुरक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता
लोको पायलट और गार्ड जैसे पदों पर बैठे कर्मचारियों के कंधों पर हजारों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी होती है। रेलवे का मानना है कि मोबाइल का इस्तेमाल केवल आधिकारिक काम के लिए होना चाहिए। व्यक्तिगत सोशल मीडिया बाजी से ध्यान भटकने पर बड़ा हादसा हो सकता है। यह फैसला व्लॉगिंग के खिलाफ नहीं, बल्कि सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।रेलवे कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी: ड्यूटी पर ‘रीलबाजी’ की तो जाएगी नौकरी!









