
राजस्थान के अलवर (अब खैरथल-तिजारा जिला) से एक बड़ी खबर सामने आई है। 13 साल की मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उन्हें 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “ऐसे अपराधी समाज के लिए कलंक”
अलवर गैंगरेप मामला:खैरथल-तिजारा जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश शैलेंद्र व्यास ने फैसला सुनाते हुए बेहद कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध ऐसे घिनौने अपराध न केवल अमानवीय हैं, बल्कि समाज के सुरक्षित ढांचे के लिए भी बड़ा खतरा हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मासूमों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसी सजा देना अनिवार्य है जो समाज में एक नजीर पेश करे।
ब्लैकमेलिंग और दरिंदगी की पूरी कहानी
मामला जुलाई 2024 का है, जब मुख्य आरोपी तेजप्रताप ने मासूम बच्ची का अपहरण किया और उसे एक फ्लैट में ले गया। वहाँ तेजप्रताप और उसके साथी गौरव ने बालिका के साथ दुष्कर्म किया और उसकी अश्लील फोटो व वीडियो बना लिए। इन वीडियो के जरिए आरोपी बच्ची को लगातार ब्लैकमेल करते रहे और किसी को बताने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दी।
अलवर गैंगरेप मामला:जुर्म का सिलसिला यहीं नहीं थमा। अक्टूबर 2024 में, आरोपी तेजप्रताप ने बच्ची को फिर से ब्लैकमेल किया और सीताराम उर्फ सितो की कार में बैठाकर उसे रेवाड़ी के एक होटल ले गया, जहाँ उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया गया। डरी-सहमी बच्ची ने आखिरकार अपने परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद 1 नवंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुख्ता सबूतों ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष ने बेहद मजबूती से पैरवी की। लोक अभियोजक के अनुसार, आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कोर्ट में निम्नलिखित साक्ष्य पेश किए गए:
23 गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए गए।
60 दस्तावेजी साक्ष्य और प्रमाण पेश किए गए।
4 भौतिक साक्ष्य (आर्टिकल्स) घटना स्थल और अपराध से जुड़े प्रदर्शित किए गए।
इन पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों की भूमिका को समान रूप से गंभीर माना और सजा का ऐलान किया।
भारी जुर्माना और पीड़िता को आर्थिक सहायता
अलवर गैंगरेप मामला:सजा के साथ-साथ न्यायालय ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है:
तेजप्रताप (मुख्य आरोपी): 1.80 लाख रुपये जुर्माना।
गौरव: 1.30 लाख रुपये जुर्माना।
सीताराम उर्फ सितो: 5 हजार रुपये जुर्माना।
इसके अलावा, कोर्ट ने पीड़िता की मानसिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे 5 लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से की है, ताकि उसे पुनर्वास में मदद मिल सके।
न्याय की जीत: पॉक्सो कोर्ट से जिला न्यायालय तक का सफर
अलवर गैंगरेप मामला:शुरुआत में इस केस का ट्रायल अलवर के विशिष्ट पॉक्सो न्यायालय संख्या-4 में चल रहा था। हालांकि, राजस्थान में नए जिलों के गठन और क्षेत्राधिकार बदलने के कारण अंतिम बहस से ठीक पहले इस केस को खैरथल-तिजारा जिला एवं सत्र न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था। इस फैसले को कानून के जानकारों ने न्याय की बड़ी जीत बताया है।
अलवर गैंगरेप मामला:यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि मासूमों के साथ खिलवाड़ करने वालों की जगह सिर्फ सलाखों के पीछे है। प्रशासन और न्यायपालिका की ऐसी सक्रियता ही अपराधियों में खौफ पैदा कर सकती है।



















