रायपुर

आयुष्मान योजना: डॉक्टरों को मिली आंशिक राहत, 2 साल से लंबित 40 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का 10% भुगतान शुरू

निजी अस्पतालों की नाराजगी के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रखने की कोशिश, करीब 30 हजार डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों को मिलेगा लाभ।

रायपुर।  आयुष्मान योजना: डॉक्टरों को मिली आंशिक राहत, 2 साल से लंबित 40 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का 10% भुगतान शुरू, आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले दो वर्षों से लंबित पड़ी प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) का भुगतान सरकार ने आंशिक रूप से शुरू कर दिया है। डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का कुल बकाया लगभग 40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें से फिलहाल 10 प्रतिशत राशि उनके खातों में डाली जा रही है। इस कदम से लगभग 30 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को फौरी राहत मिलेगी।

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यह भुगतान ऐसे समय में शुरू किया गया है जब निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत बकाया भुगतान न होने के कारण नाराज हैं और सितंबर से इलाज बंद करने की चेतावनी दे चुके हैं। माना जा रहा है कि सरकार निजी अस्पतालों के दबाव के बीच सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए यह कदम उठा रही है। कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों की लंबित प्रोत्साहन राशि 7 से 10 लाख रुपये तक हो चुकी है, जिन्हें अभी 7 से 10 प्रतिशत का भुगतान किया गया है।आयुष्मान योजना: डॉक्टरों को मिली आंशिक राहत

क्यों शुरू हुई थी प्रोत्साहन राशि योजना?

लगभग पांच साल पहले, आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का निशुल्क उपचार करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ को प्रोत्साहित करने तथा उनमें टीम भावना जगाने के उद्देश्य से यह नियम बनाया गया था। इसके तहत, योजना से इलाज के बाद अस्पताल को मिलने वाली क्लेम राशि का 25% हिस्सा प्रोत्साहन के रूप में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों में बांटा जाना था। शुरुआत में यह व्यवस्था लगभग दो साल तक नियमित रूप से चली, लेकिन बाद में इसमें अनियमितता की शिकायतें आने लगीं।आयुष्मान योजना: डॉक्टरों को मिली आंशिक राहत

अनियमितता की शिकायतों के बाद लगी थी रोक

सूत्रों के अनुसार, इस योजना का लाभ वरिष्ठ डॉक्टरों और सर्जनों को तो मिला, लेकिन निचले स्तर के कर्मचारियों तक उनका हिस्सा नहीं पहुंच रहा था। रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में कुछ डॉक्टरों की प्रोत्साहन राशि उनके मासिक वेतन से भी अधिक हो जाती थी। जब निचले स्तर के कर्मचारियों ने इसका विरोध किया और नाराजगी बढ़ी, तो इस व्यवस्था पर रोक लगा दी गई थी। अब दो साल बाद, सरकार ने लंबित राशि का एक छोटा हिस्सा जारी कर सरकारी अस्पतालों में उपचार व्यवस्था को पटरी पर रखने का प्रयास किया है।आयुष्मान योजना: डॉक्टरों को मिली आंशिक राहत

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