Balod Dhan Kharidi Update: 10 हजार किसानों की बढ़ी टेंशन, टारगेट से 12 लाख क्विंटल कम हुई धान खरीदी

Balod Dhan Kharidi Update: छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी का सीजन 30 जनवरी को समाप्त हो गया है। बालोद जिले में इस बार का Paddy Procurement Season काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। एक तरफ जहां खरीदी बंद होने से समिति प्रभारियों ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी ओर हजारों किसान अपना धान नहीं बेच पाने के कारण मायूस हैं।
Target से पीछे रहा बालोद जिला (Missed the Target)
Balod Dhan Kharidi Update: इस साल प्रशासन ने बालोद जिले के लिए 82 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य (Target) रखा था। लेकिन आंकड़ों के अनुसार, लक्ष्य के मुकाबले 12,21,806 क्विंटल कम धान की खरीदी हुई है।
Farmers Participation Stats:
Total Registrations: 1,55,119 किसानों ने पंजीयन कराया था।
Actual Sellers: केवल 1,44,554 किसान ही अपना धान बेच पाए।
Left Behind: करीब 10,565 किसान टोकन या अन्य समस्याओं की वजह से अपना धान बेचने से चूक गए।
Lifting (परिवहन) बनी बड़ी चुनौती
Balod Dhan Kharidi Update: धान खरीदी तो खत्म हो गई है, लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या Storage और Transportation की है।
जिले के 143 केंद्रों में फिलहाल 47% धान का ही उठाव (Lifting) हो पाया है।
लगभग 36,94,521 क्विंटल धान अभी भी खरीदी केंद्रों में खुले में पड़ा है।
Risk Factor: धान के उठाव में देरी होने से ‘सूखत’ (Weight loss due to drying) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे समितियों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
Politics and Protests: तिथि बढ़ाने की मांग
Balod Dhan Kharidi Update: धान खरीदी के अंतिम दिनों में बालोद के कई केंद्रों पर हंगामा और विरोध प्रदर्शन भी देखा गया। Congress कार्यकर्ताओं और किसानों का आरोप है कि सर्वर डाउन होने और टोकन समय पर न मिलने के कारण हजारों किसान वंचित रह गए। विपक्षी दलों ने सरकार से धान खरीदी की Last Date आगे बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन फिलहाल 30 जनवरी को पोर्टल बंद कर दिया गया है।
Balod Dhan Kharidi: At a Glance (Fact File)
| विवरण | आंकड़े |
| कुल सेवा सहकारी समितियां | 122 |
| कुल धान खरीदी केंद्र | 143 |
| इस साल का लक्ष्य | 82 लाख क्विंटल |
| खरीदी में कमी | 12.21 लाख क्विंटल |
| वंचित किसान | 10,565 |
Balod Dhan Kharidi Update: बालोद जिले में इस बार धान खरीदी का सफर विवादों और चुनौतियों से घिरा रहा। अब प्रशासन का पूरा फोकस बचे हुए धान के Fast Transportation पर है ताकि मानसून पूर्व या अन्य कारणों से धान खराब न हो।



















