Balodabazar Honey Trap Case: पुलिस की फाइलों में ‘फरार’, शहर में सरेआम! आखिर 1.5 साल बाद भी क्यों आज़ाद है संकेत शुक्ला?

Balodabazar Honey Trap Case:छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार का सबसे चर्चित Honey Trap और Sextortion कांड एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल केस का मुख्य आरोपी संकेत शुक्ला (Sanket Shukla) पिछले डेढ़ साल से पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की फाइलों में वह ‘फरार’ है, लेकिन स्थानीय चर्चाओं की मानें तो वह खुलेआम शहर में घूम रहा है। आखिर पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम क्यों है? क्या उसे किसी बड़े ‘हाथ’ का संरक्षण प्राप्त है?
क्या है पूरा मामला? (The Honey Trap Scandal)
Balodabazar Honey Trap Case:बलौदाबाजार में करीब डेढ़ साल पहले एक बड़े हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। इस मामले में पुलिस ने अब तक 9 से ज्यादा आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है। लेकिन मामले का अहम मोहरा संकेत शुक्ला अब भी फरार चल रहा है। सिटी कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली (Working Style) पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस का कोर्ट में हलफनामा vs ग्राउंड रियलिटी
Balodabazar Honey Trap Case: हाल ही में बलौदाबाजार पुलिस ने जिला सत्र न्यायालय (District Sessions Court) में इस सेक्सटॉर्शन मामले का Supplementary Challan (अनुपूरक चालान) पेश किया। पुलिस ने बाकायदा कोर्ट में हलफनामा (Affidavit) दिया है कि संकेत शुक्ला फरार है और उसकी तलाश जारी है।
Balodabazar Honey Trap Case:लेकिन ट्विस्ट यहां है: स्थानीय सूत्रों और आम जनता का दावा है कि आरोपी शहर में ही मौजूद है और बेखौफ घूम रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस सच में उसे ढूंढ नहीं पा रही है या फिर Political Pressure के चलते हाथ डालने से कतरा रही है?
Dual Standards? पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
Balodabazar Honey Trap Case:जब एक ही केस में 9 लोग गिरफ्तार हो सकते हैं, तो केवल एक रसूखदार आरोपी कैसे बचा रह सकता है?
Political Backing: क्या संकेत शुक्ला को किसी बड़े राजनीतिक दल का संरक्षण प्राप्त है?
Police Failure: क्या यह पुलिस की इंटेलिजेंस का फेलियर है या जानबूझकर की गई ढिलाई?
Law & Order: कोर्ट में ‘फरार’ घोषित आरोपी का सरेआम घूमना कानून-व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल है।
जनता में भारी आक्रोश (Public Outrage)
Balodabazar Honey Trap Case:डेढ़ साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी न होना आम जनता के बीच गुस्से का कारण बना हुआ है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर पुलिस की चुप्पी की आलोचना हो रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दबाव के बाद क्या कदम उठाता है।



















