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भिलाई नगर निगम, रिसाली नगर निगम, संपत्ति घोटाला, भूमि लेखा-जोखा, महापौर जिम्मेदारी, नियमितीकरण प्रक्रिया, नगर निगम पार्षद, जनता का अधिकार

भिलाई-रिसाली निगम की संपत्तियों में पारदर्शिता की कमी से जनता को नुकसान, पार्षदों ने उठाए सवाल

 अविभाजित भिलाई निगम की संपत्ति पर सवाल, नोटिस से मचा हड़कंप

भिलाई। भिलाई और रिसाली नगर निगम की संपत्तियों के लेखा-जोखा में पारदर्शिता की कमी अब बड़े विवाद का कारण बन गई है। भूमि घोटालों और प्रशासनिक अनियमितताओं के चलते न केवल निगम को राजस्व का नुकसान हुआ है, बल्कि आम जनता भी अपनी मेहनत की कमाई से खरीदे भूखंडों को लेकर ठगी और धोखाधड़ी का सामना कर रही है। संपत्ति घोटाला

? महापौर को भेजा गया संज्ञान नोटिस, उठाए गए ये बड़े सवाल

जनप्रतिनिधियों और नागरिकों द्वारा महापौरगण को एक संज्ञान नोटिस भेजा गया है, जिसमें निम्नलिखित अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं:

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  • क्या नगर निगम ने अविभाजित संपत्तियों का रिकॉर्ड अपडेट किया है?
  • क्या आम जनता को भूखंड की वैधता और स्वामित्व की जानकारी पारदर्शी रूप से मिल रही है?
  • क्या महापौर ने अपनी पदेन जिम्मेदारी का सही से निर्वहन किया है?

? भूखंड नियमितीकरण की प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

अब सामान्य नागरिकों के आवासीय प्रयोजन हेतु भूखंडों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को नोटिस कार्यवाही के जरिए पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे वे लोग जो वर्षों से अपने घर के लिए कानूनी मान्यता का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें राहत मिल सकती है। संपत्ति घोटाला

?‍♂️ पार्षदों की सक्रियता बढ़ी, जनता को मिल सकता है अधिकार

सभी पार्षदों को नोटिस की कॉपी व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी गई है और वे चाहें तो नगर निगम आयुक्त से इसकी छायाप्रति भी प्राप्त कर सकते हैं। यह नोटिस पार्षदों को उनके पदेन प्राधिकार का प्रयोग कर अपने-अपने वार्ड की निगम संपत्ति की जानकारी मांगने को बाध्य कर रहा है। संपत्ति घोटाला

⚖️ कांग्रेस पर सवाल, वर्षों से जिम्मेदारी नहीं निभाने का आरोप

अविभाजित भिलाई निगम में वर्षों से कांग्रेस की सरकार रही है और महापौर भी कांग्रेस से संबंधित रहे हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने संपत्ति के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी को नजरअंदाज किया, जिससे जमीन दलालों को फायदा मिला और जनता को नुकसान। संपत्ति घोटाला

?️ अब जनता भी मांग सकती है अपने वार्ड की जानकारी

इस नोटिस का सहारा लेकर अब आम नागरिक भी अपने वार्ड की शासकीय अचल संपत्तियों की जानकारी मांग सकते हैं। यह एक नागरिक अधिकार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। संपत्ति घोटाला

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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