धान खरीदी में बड़ा फैसला: जिन सोसाइटियों में हुई धान की शॉर्टेज, उनके प्रबंधक रहेंगे खरीदी से दूर
सहकारिता पंजीयक कार्यालय ने जारी किया आदेश, प्रबंधकों ने जताई आपत्ति—कहा प्राकृतिक कारणों से हुई धान की कमी, हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन

धान खरीदी में बड़ा फैसला: जिन सोसाइटियों में हुई धान की शॉर्टेज, उनके प्रबंधक रहेंगे खरीदी से दूर, छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सहकारिता विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य की जिन सहकारी सोसाइटियों में पिछले खरीफ सीजन में धान की शॉर्टेज (कमी) पाई गई थी, उनके प्रबंधकों को इस साल की धान खरीदी प्रक्रिया से अलग रखने का आदेश जारी किया गया है। सहकारिता पंजीयक कार्यालय द्वारा जारी इस आदेश में संबंधित प्राधिकृत अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि ऐसे प्रबंधकों की जगह अन्य कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए और कार्रवाई की जानकारी सात दिनों के भीतर जिला सहकारिता कार्यालय को दी जाए।
यह है पूरा मामला
राज्य में खरीफ सीजन 2024-25 के दौरान करीब 2,739 सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से नवंबर 2024 से जनवरी 2025 तक 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। जब इस धान को मिलरों और संग्रहण केंद्रों तक भेजा गया, तब यह सामने आया कि गर्मी और प्राकृतिक कारणों से धान सूखने के कारण उसकी मात्रा में कमी आई है। इस कमी के लिए कई जगहों पर सोसाइटी प्रबंधकों को जिम्मेदार ठहराया गया।धान खरीदी में बड़ा फैसला: जिन सोसाइटियों में हुई धान की शॉर्टेज
प्राधिकृत अधिकारियों को मिले निर्देश
रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र की कई सोसाइटियों — जैसे बंजारी, पिपरौद, तोरला, सुंदरकेरा, चंपाझर, पोंड, जामगांव, टीला और मानिकचौरी — में धान की शॉर्टेज सामने आई थी। इन सोसाइटियों के लिए जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित प्रबंधकों को खरीदी कार्य से पृथक कर अन्य कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए। आदेश का पालन नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई हैधान खरीदी में बड़ा फैसला: जिन सोसाइटियों में हुई धान की शॉर्टेज
प्राधिकृत अधिकारी प्रबंधकों के पक्ष में
सूत्रों के अनुसार, रायपुर जिले के कई प्राधिकृत अधिकारी इन प्रबंधकों के पक्ष में हैं, लेकिन खुलकर बोलने से बच रहे हैं। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि,धान खरीदी में बड़ा फैसला: जिन सोसाइटियों में हुई धान की शॉर्टेज
“धान सूखत का मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं।”
गौरतलब है कि सोसाइटियों में चुनाव न होने के कारण शासन द्वारा अध्यक्ष के स्थान पर प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जिनमें कई भाजपा समर्थक बताए जा रहे हैं।
प्रबंधकों की दलील
प्रबंधकों का कहना है कि धान की कमी उनकी लापरवाही से नहीं, बल्कि प्राकृतिक और प्रशासनिक कारणों से हुई है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर बताया कि धान का उठाव अधिकृत एजेंसियों द्वारा समय पर नहीं किया गया, जिससे संग्रहित धान की मात्रा बफर सीमा से अधिक हो गई।
उनका कहना है कि —
“बार-बार निवेदन करने के बावजूद धान का उठाव देर से हुआ। इस दौरान सूखावट, चूहे और मौसम की वजह से नुकसान हुआ। अब हम पर बकाया वसूली और आपराधिक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है, जबकि यह जिम्मेदारी शासकीय एजेंसियों की थी।”
प्रबंधकों ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, धान के उठाव में हुई देरी और प्राकृतिक हानि को ध्यान में रखते हुए विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।धान खरीदी में बड़ा फैसला: जिन सोसाइटियों में हुई धान की शॉर्टेज









