बिलासपुर

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता पिता, शादी के लिए देने होंगे 5 लाख रुपये

कोर्ट ने 'कन्यादान' को बताया पिता का पवित्र कर्तव्य, कहा- बालिग होने के बावजूद बेटी के भरण-पोषण और विवाह के खर्च के लिए पिता कानूनी रूप से बाध्य है।

बिलासपुर
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी पिता अपनी अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता। कोर्ट ने कहा कि बेटी चाहे बालिग ही क्यों न हो जाए, उसके भरण-पोषण और शादी के खर्च की जिम्मेदारी पिता की ही है।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट, सूरजपुर के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पिता को अपनी 25 वर्षीय बेटी को गुजारा भत्ता और शादी का खर्च देने का निर्देश दिया गया था।अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता पिता, शादी के लिए देने होंगे 5 लाख रुपये

क्या है पूरा मामला?
यह मामला सूरजपुर जिले के एक सरकारी शिक्षक राजकुमार सोनवानी और उनकी 25 वर्षीय बेटी पूर्णिमा सोनवानी से जुड़ा है। फैमिली कोर्ट ने पिता को आदेश दिया था कि वह अपनी बेटी को हर महीने 2,500 रुपये गुजारा भत्ता दें और उसकी शादी के लिए 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान करें।अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता पिता, शादी के लिए देने होंगे 5 लाख रुपये

इस फैसले के खिलाफ पिता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। पिता की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दोनों पक्षों ने आय का हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया था, इसलिए निचली अदालत का आदेश सही नहीं है।अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता पिता, शादी के लिए देने होंगे 5 लाख रुपये

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘कन्यादान पिता का पवित्र कर्तव्य’
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पिता की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि “कन्यादान एक पवित्र कर्तव्य है, जिससे पिता पीछे नहीं हट सकता।”

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अभिलाषा बनाम प्रकाश मामले का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा:

“हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 के तहत, एक अविवाहित बेटी को अपने पिता से भरण-पोषण और विवाह व्यय मांगने का वैधानिक अधिकार है। यह अधिकार तब तक लागू रहता है जब तक वह अपना खर्च स्वयं उठाने में सक्षम नहीं हो जाती, भले ही वह बालिग हो गई हो।”

पिता की आर्थिक स्थिति और कोर्ट का आदेश
याचिकाकर्ता पिता एक सरकारी शिक्षक हैं और उनकी मासिक आय 44,642 रुपये बताई गई है। यह भी सामने आया कि पिता ने दूसरी शादी कर ली है और उस शादी से उनके दो बच्चे हैं।अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता पिता, शादी के लिए देने होंगे 5 लाख रुपये

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद, सुनवाई के दौरान पिता की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि वे:

  1. बेटी को नियमित रूप से 2,500 रुपये मासिक भरण-पोषण देंगे।

  2. शादी के खर्च के लिए 5 लाख रुपये की राशि तीन महीने के भीतर जमा करेंगे।

इस आश्वासन और कानूनी प्रावधानों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पिता की अपील को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।अविवाहित बेटी की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता पिता, शादी के लिए देने होंगे 5 लाख रुपये

  • फैसला: अविवाहित बेटी (बालिग होने पर भी) का भरण-पोषण पिता की कानूनी जिम्मेदारी।

  • कानून: हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 का हवाला।

  • राशि: 2,500 रुपये मासिक भत्ता और शादी के लिए 5 लाख रुपये।

  • टिप्पणी: कन्यादान पिता का पवित्र कर्तव्य है।

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