
मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक, क्या हटेगा राष्ट्रपति शासन? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी. मणिपुर की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगे 10 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और अब वहां एक बार फिर चुनी हुई सरकार की वापसी की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) हाईकमान ने राज्य के सभी विधायकों को रविवार को दिल्ली तलब किया है, जिसके बाद से अटकलों का बाजार गर्म है।
दिल्ली क्यों बुलाए गए विधायक?
फरवरी में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का एक साल पूरा होने वाला है। इस संवैधानिक समय सीमा के नजदीक आते ही भाजपा नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने पुष्टि की है कि पार्टी नेतृत्व ने राज्य के हालात पर चर्चा करने के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया है।मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक
बीरेन सिंह ने कहा, “हमें बैठक के एजेंडे की पूरी जानकारी तो नहीं है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि बातचीत का मुख्य केंद्र राज्य में फिर से एक लोकप्रिय और चुनी हुई सरकार की बहाली हो सकता है।”मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक
क्या बदल जाएगा मुख्यमंत्री का चेहरा?
सबसे बड़ा सवाल जो इस वक्त सियासी गलियारों में गूंज रहा है, वह यह है कि क्या एन. बीरेन सिंह दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे? मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस बार सीएम पद के लिए चेहरा बदला जा सकता है।मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक
एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिए हैं कि एन. बीरेन सिंह के दोबारा शपथ लेने की संभावना बेहद कम है। हालांकि, पार्टी नई सरकार के गठन के लिए पूरी तरह गंभीर है, क्योंकि विधानसभा को भंग नहीं किया गया था, बल्कि ‘सस्पेंडेड एनीमेशन’ (निलंबित अवस्था) में रखा गया था।मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक
केंद्र की निगरानी से सुधरे हालात
मोदी सरकार का मानना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति नाजुक जरूर थी, लेकिन राष्ट्रपति शासन के दौरान इसमें काफी सुधार आया है। पिछले कुछ महीनों में हिंसा की घटनाओं और हत्याओं में भारी कमी दर्ज की गई है। केंद्र का मानना है कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर सीधे केंद्रीय नियंत्रण के कारण ही यह शांति संभव हो पाई है।मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक
हाल ही में भाजपा के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष और पूर्वोत्तर के समन्वयक संबित पात्रा ने भी इंफाल का दौरा किया था। उन्होंने बंद कमरे में विधायकों और सहयोगियों के साथ बैठक कर जमीनी हकीकत और स्थिरता का जायजा लिया था।मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक
राष्ट्रपति शासन बढ़ाना क्यों नहीं है आसान?
सरकार गठन की इतनी जल्दी के पीछे एक बड़ी संवैधानिक मजबूरी भी है। संविधान के मुताबिक, किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन को 1 साल से ज्यादा बढ़ाने के लिए दो शर्तें पूरी होनी जरूरी हैं:
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देश में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) लागू हो।
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चुनाव आयोग लिखित में यह प्रमाणित करे कि हालात चुनाव कराने लायक नहीं हैं।
चूंकि वर्तमान में ऐसी स्थितियां पूरी तरह लागू नहीं होतीं, इसलिए 44वें संवैधानिक संशोधन (1978) के तहत राष्ट्रपति शासन को एक साल से आगे बढ़ाना कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार और भाजपा अब जल्द से जल्द राज्य में एक चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपने की तैयारी कर रही हैं।मणिपुर में बड़ी सियासी हलचल: दिल्ली दरबार में तलब हुए BJP विधायक









