
CG Financial Fraud News: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में सरकारी धन की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट के ‘पर्यावरण अधोसंरचना विकास उपकर’ खाते से 26 लाख 87 हजार रुपये का अनधिकृत ट्रांजेक्शन किया गया है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर कुंदन कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है और बैंक प्रबंधन के खिलाफ जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
सरकारी खजाने से निजी खाते में पैसे ट्रांसफर, प्रशासन अलर्ट
मुंगेली कलेक्ट्रेट के सरकारी खाते में बड़ी सेंधमारी:मुंगेली कलेक्ट्रेट का यह विशेष खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की स्थानीय शाखा में संचालित है। आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक अनुमति या प्रक्रिया के, सरकारी खाते से भारी भरकम राशि किसी निजी खाते में भेज दी गई। कलेक्टर ने इस मामले को “गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी” करार देते हुए कहा कि सरकारी पैसे का एक सेकंड के लिए भी निजी खाते में जाना कानूनन अपराध है।
बैंक का ‘पैसे वापसी’ का तर्क खारिज: कलेक्टर ने उठाए सवाल
मुंगेली कलेक्ट्रेट के सरकारी खाते में बड़ी सेंधमारी:जब प्रशासन ने बैंक से जवाब मांगा, तो बैंक प्रबंधन ने दलील दी कि ट्रांजेक्शन के बाद राशि को वापस सरकारी खाते में जमा कर दिया गया है। हालांकि, कलेक्टर कुंदन कुमार ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पैसा वापस आना इस बात का प्रमाण नहीं है कि अपराध नहीं हुआ। सवाल यह है कि बिना अनुमति के यह ट्रांजेक्शन हुआ कैसे और इसके पीछे किसका हाथ है?
तीन बड़े ट्रांजेक्शन और बैंक रिकॉर्ड में विसंगतियां
मुंगेली कलेक्ट्रेट के सरकारी खाते में बड़ी सेंधमारी:प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बैंकिंग सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाते हैं:
तीन बड़े ट्रांजेक्शन: 9 लाख, 8 लाख और 6 लाख रुपये की बड़ी राशि निकाली गई।
एंट्री में अंतर: बैंक रिकॉर्ड में कुल 6 ट्रांजेक्शन दर्ज पाए गए हैं।
मैनेजर आईडी का उपयोग: नियमानुसार, इतनी बड़ी राशि के लेन-देन के लिए ब्रांच मैनेजर की ऑथराइजेशन आईडी अनिवार्य होती है, जिससे मामला और संदिग्ध हो जाता है।
‘लंच टाइम’ का बहाना और बैंक की गैर-जिम्मेदाराना दलील
मुंगेली कलेक्ट्रेट के सरकारी खाते में बड़ी सेंधमारी:बैंक की ओर से यह सफाई दी गई कि एक कर्मचारी ने ‘लंच टाइम’ के दौरान यह ट्रांजेक्शन किया। कलेक्टर ने इसे पूरी तरह से बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बिना उच्चाधिकारी की आईडी के ट्रांजेक्शन संभव नहीं है, तो क्या बैंक की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर है कि कोई भी कर्मचारी करोड़ों का हेरफेर कर दे?
विस्तृत जांच और सख्त कार्रवाई की तैयारी
मुंगेली कलेक्ट्रेट के सरकारी खाते में बड़ी सेंधमारी:जिला प्रशासन ने बैंक प्रबंधन से इस पूरे प्रकरण पर लिखित और विस्तृत जवाब मांगा है। जांच टीम अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या यह किसी बड़े रैकेट का हिस्सा है। कलेक्टर के इस सख्त एक्शन से बैंकिंग जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में बैंक के जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ी गाज गिर सकती है।



















