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Bilaspur High Court: हेट स्पीच मामले में अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग वाली याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- पुलिस जांच में दखल नहीं देंगे

Hate Speech Case: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख पर सिंधी, जैन और अग्रवाल समाज के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने का आरोप है। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी के निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा कि यह जांच का 'माइक्रो मैनेजमेंट' होगा।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने हेट स्पीच के मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह पुलिस द्वारा की जा रही आपराधिक जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगा और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी का सीधा आदेश दे सकता है।

यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनाया है।हेट स्पीच मामले में अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग वाली याचिका खारिज

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क्या था पूरा मामला?
रायपुर के अवंती विहार निवासी अमित अग्रवाल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि अमित बघेल लगातार सिंधी, जैन और अग्रवाल समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी और हेट स्पीच (Hate Speech) दे रहे हैं।हेट स्पीच मामले में अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग वाली याचिका खारिज

याचिका में कोर्ट के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं:

  1. अमित बघेल की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।

  2. पुलिस जांच की निगरानी (Monitoring) कोर्ट द्वारा की जाए।

  3. तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।

याचिकाकर्ता का कहना था कि बघेल के खिलाफ कई एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद राज्य पुलिस कार्रवाई में देरी कर रही है।

सरकार की दलील- कानून अपना काम कर रहा है
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अमित बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जारी है। सरकार ने जांच में ढिलाई या निष्क्रियता के आरोपों को गलत बताया।हेट स्पीच मामले में अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग वाली याचिका खारिज

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब पुलिस पहले से ही मामले की जांच कर रही है और एफआईआर दर्ज हैं, तो कोर्ट के दखल देने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा:

  • नहीं दे सकते गिरफ्तारी का आदेश: न्यायालय किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी का सीधा आदेश नहीं दे सकता, यह जांच एजेंसी का अधिकार क्षेत्र है।

  • माइक्रो मैनेजमेंट नहीं करेगा कोर्ट: जांच की निगरानी करना या जांच का तरीका तय करना कोर्ट का काम नहीं है। ऐसा करना ‘क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का माइक्रो मैनेजमेंट’ (Micro-management of Criminal Investigation) कहलाएगा।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि जांच जारी है, इसलिए इस चरण में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। इन आधारों पर कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।हेट स्पीच मामले में अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग वाली याचिका खारिज

Pooja Chandrakar

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