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बिलासपुर हाईवे फिर हुआ लहूलुहान: 15 गौ-वंशों को रौंद गया तेज रफ्तार वाहन, हाईकोर्ट ने पूछा- आखिर कब रुकेगा ये सिलसिला?

बिलासपुर हाईवे फिर हुआ लहूलुहान: 15 गौ-वंशों को रौंद गया तेज रफ्तार वाहन, हाईकोर्ट ने पूछा- आखिर कब रुकेगा ये सिलसिला?

बिलासपुर हाईवे फिर हुआ लहूलुहान: 15 गौ-वंशों को रौंद गया तेज रफ्तार वाहन, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नेशनल हाईवे एक बार फिर गौ-वंश के खून से लहूलुहान हो गया। देर रात एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे 15 मवेशियों को बेरहमी से रौंद दिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जिले में लगातार हो रही इन घटनाओं पर अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है और नेशनल हाईवे अथॉरिटी से जवाब तलब किया है।

एक ही झटके में 15 जानें, महीने भर में 50 से ज्यादा मौतें

यह भयावह घटना जिले के सरगांव थाना क्षेत्र के लिमतरा नेशनल हाईवे पर घटी। जानकारी के अनुसार, गौ-वंश का एक झुंड सड़क पर बैठा हुआ था, तभी एक तेज रफ्तार वाहन उन्हें रौंदता हुआ निकल गया। इस हादसे में 16 में से 15 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गाय गंभीर रूप से घायल है। यह कोई अकेली घटना नहीं है; पिछले एक महीने में ही जिले में 50 से अधिक गौ-वंशों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है, जो प्रशासन और हाईवे प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।बिलासपुर हाईवे फिर हुआ लहूलुहान: 15 गौ-वंशों को रौंद गया तेज रफ्तार वाहन

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हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, NHAI से मांगा जवाब

जिले में गौ-वंशों की लगातार हो रही मौत को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और कई अहम निर्देश दिए:

  • शपथपत्र में जवाब तलब: कोर्ट ने नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को अगस्त तक एक शपथपत्र में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

  • पूछा, क्या एक्शन लिया?: हाईकोर्ट ने पूछा है कि गौ-वंशों की मौत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या योजना है।

  • साइन बोर्ड पर सवाल: कोर्ट ने नेशनल हाईवे पर उचित साइन बोर्ड और सुरक्षा उपायों की कमी पर भी सुनवाई की।

गौ-सेवकों में भारी आक्रोश, कब थमेगा मौतों का सिलसिला?

बिलासपुर हाईवे फिर हुआ लहूलुहान: 15 गौ-वंशों को रौंद गया तेज रफ्तार वाहन, हाईकोर्ट ने पूछा- आखिर कब रुकेगा ये सिलसिला?
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नेशनल हाईवे एक बार फिर गौ-वंश के खून से लहूलुहान हो गया। देर रात एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे 15 मवेशियों को बेरहमी से रौंद दिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जिले में लगातार हो रही इन घटनाओं पर अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है और नेशनल हाईवे अथॉरिटी से जवाब तलब किया है।
एक ही झटके में 15 जानें, महीने भर में 50 से ज्यादा मौतें
यह भयावह घटना जिले के सरगांव थाना क्षेत्र के लिमतरा नेशनल हाईवे पर घटी। जानकारी के अनुसार, गौ-वंश का एक झुंड सड़क पर बैठा हुआ था, तभी एक तेज रफ्तार वाहन उन्हें रौंदता हुआ निकल गया। इस हादसे में 16 में से 15 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गाय गंभीर रूप से घायल है। यह कोई अकेली घटना नहीं है; पिछले एक महीने में ही जिले में 50 से अधिक गौ-वंशों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है, जो प्रशासन और हाईवे प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, NHAI से मांगा जवाब
जिले में गौ-वंशों की लगातार हो रही मौत को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और कई अहम निर्देश दिए:
शपथपत्र में जवाब तलब: कोर्ट ने नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को अगस्त तक एक शपथपत्र में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
पूछा, क्या एक्शन लिया?: हाईकोर्ट ने पूछा है कि गौ-वंशों की मौत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या योजना है।
साइन बोर्ड पर सवाल: कोर्ट ने नेशनल हाईवे पर उचित साइन बोर्ड और सुरक्षा उपायों की कमी पर भी सुनवाई की।
गौ-सेवकों में भारी आक्रोश, कब थमेगा मौतों का सिलसिला?
इस दर्दनाक घटना के बाद से स्थानीय गौ-सेवकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण हाईवे मवेशियों के लिए 'मौत का घाट' बन गए हैं। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के सख्त रुख और अगस्त में नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या कोर्ट की इस फटकार के बाद प्रशासन जागेगा और इन बेजुबान जानवरों की मौत का सिलसिला थमेगा?

इस दर्दनाक घटना के बाद से स्थानीय गौ-सेवकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण हाईवे मवेशियों के लिए ‘मौत का घाट’ बन गए हैं। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के सख्त रुख और अगस्त में नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या कोर्ट की इस फटकार के बाद प्रशासन जागेगा और इन बेजुबान जानवरों की मौत का सिलसिला थमेगा?बिलासपुर हाईवे फिर हुआ लहूलुहान: 15 गौ-वंशों को रौंद गया तेज रफ्तार वाहन

Pooja Chandrakar

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