बक्सर निवासी को सूचना आयोग से 5 साल बाद मिला जवाब, व्यक्ति हैरान

बक्सर: बक्सर जिले के निवासी शिवप्रकाश राय को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकारी यात्रा और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं पर जानकारी प्राप्त करने के लिए राज्य सूचना आयोग से 5 साल बाद जवाब मिला है। उन्होंने 2020 में RTI के तहत मुख्यमंत्री की यात्रा से जुड़ी जानकारी और राज्य सूचना आयोग में विभिन्न पदों की रिक्तियों पर जानकारी मांगी थी। इन सूचनाओं में मुख्यमंत्री की यात्रा पर खर्च, राज्य सूचना आयोग में स्वीकृत कार्यबल, और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन वीसी पर खर्च की जानकारी शामिल थी। बक्सर निवासी को सूचना आयोग से 5 साल बाद मिला जवाब, व्यक्ति हैरान
5 साल बाद मिली प्रतिक्रिया
शिवप्रकाश राय बताते हैं कि उन्हें राज्य सूचना आयोग से बताया गया है कि उनकी मांगी गई दो सूचनाओं की सुनवाई दिसंबर में और बाकी दो सूचनाओं की सुनवाई जनवरी के अंत तक होगी। दिसंबर में सीएम नीतीश कुमार की यात्रा और सूचना आयोग में कार्यबल की स्थिति पर सुनवाई होनी थी, लेकिन एक सूचना की सुनवाई ही हुई, जबकि दूसरी सूचना पर कोई जवाब नहीं मिला। जनवरी में चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के VC पर खर्च की जानकारी और मीडिया के प्रतिनिधियों के लिए किए गए संस्तुति पर सुनवाई की जानकारी दी गई। बक्सर निवासी को सूचना आयोग से 5 साल बाद मिला जवाब, व्यक्ति हैरान
सूचना का अधिकार अधिनियम और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
शिवप्रकाश ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी 30 दिनों में दी जानी चाहिए थी, लेकिन इसमें 5 साल का लंबा समय लग गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग जानबूझकर जानकारी देने में देरी कर रहा है और अधिकारी दंडित नहीं हो रहे हैं। उनका कहना था कि यदि सूचना समय पर नहीं मिल रही है तो ऐसे आयोग को बंद कर देना चाहिए ताकि जनता का पैसा बच सके। बक्सर निवासी को सूचना आयोग से 5 साल बाद मिला जवाब, व्यक्ति हैरान
आयोग की कार्यवाही पर आशंका
शिवप्रकाश ने बताया कि सूचना आयोग में सुनवाई प्रक्रिया पहले अधिक पारदर्शी थी, जिसमें डबल बेंच और ट्रिपल बेंच भी होते थे ताकि आवेदक संतुष्ट न होने पर अपील की जा सके। लेकिन अब इस प्रक्रिया में बदलाव आया है और कई बार सुनवाई का कोई स्पष्ट परिणाम नहीं मिलता। बक्सर निवासी को सूचना आयोग से 5 साल बाद मिला जवाब, व्यक्ति हैरान
आगे की कार्रवाई का इंतजार
शिवप्रकाश अब आगे की सुनवाई की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि आयोग की कार्यवाही में देरी और अधिकारियों की लापरवाही जनता के हितों के खिलाफ है। बक्सर निवासी को सूचना आयोग से 5 साल बाद मिला जवाब, व्यक्ति हैरान



















