स्वास्थ्य

संसद में गूंजा कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला: सरकार ने कहा- हर साल फेल हो रहे 3 हजार दवा सैंपल, 700 कंपनियों का हुआ ऑडिट

राज्यसभा में सांसद दिग्विजय सिंह के सवाल पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का जवाब- जांच में मिली जानलेवा केमिकल की पुष्टि, दवा पैकेजिंग पर अब क्यूआर कोड अनिवार्य।

नई दिल्ली/भोपाल। संसद में गूंजा कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला: सरकार ने कहा- हर साल फेल हो रहे 3 हजार दवा सैंपल, 700 कंपनियों का हुआ ऑडिट. मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का गंभीर मामला मंगलवार को संसद में उठा। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह सहित कई अन्य सदस्यों ने इस मुद्दे पर सरकार से तीखे सवाल पूछे। इसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्वीकार किया कि जांच के दौरान कई दवाएं अमानक पाई गई हैं और सरकार ने इस दिशा में सख्त कदम उठाए हैं।

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जांच में मिला जानलेवा ‘डाईएथिलिन ग्लाइकाल’
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सदन को बताया कि सितंबर 2025 में हुई घटनाओं के बाद केंद्र की एक विशेष टीम ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और महाराष्ट्र के नागपुर का दौरा किया था। टीम ने वहां 19 दवाओं की जांच कराई, जिनमें से 4 अमानक (Substandard) मिलीं।संसद में गूंजा कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला

लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बच्चों ने जिस सिरप का सेवन किया था, उसमें ‘डाईएथिलिन ग्लाइकाल’ (Diethylene Glycol) की मात्रा 46% (वजन/आयतन) पाई गई, जो बेहद खतरनाक है। इसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पुदुचेरी में संबंधित दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया।संसद में गूंजा कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला

700 कंपनियों का ऑडिट और क्यूआर कोड अनिवार्य
दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। मंत्री ने बताया कि राज्य प्राधिकरणों के माध्यम से अब तक 700 से अधिक कफ सिरप निर्माता कंपनियों का ऑडिट कराया जा चुका है। इसके अलावा, नकली और अमानक दवाओं की पहचान के लिए दवा की पैकेजिंग पर ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) देना अनिवार्य कर दिया गया है।संसद में गूंजा कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला

आंकड़े डराने वाले: हर साल 3000 सैंपल हो रहे फेल
संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि दवा की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीते कुछ वर्षों में हर साल औसतन 3000 दवा के नमूने जांच में फेल हो रहे हैं। वर्ष 2024-25 में अब तक सबसे ज्यादा 3,104 नमूने अमानक पाए गए हैं।संसद में गूंजा कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला

बीते 5 वर्षों में दवा नमूनों की जांच और मिलावट का ब्यौरा:

वर्षकुल जांच (नमूने)अमानक (Substandard)मिलावटी/नकली
2024-251,16,3233,104245
2023-241,96,1502,988282
2022-2396,7133,053424
2021-2288,8442,545379
2020-2184,8742,652262

सरकार द्वारा जारी इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दवा निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी अभी भी जारी है, जिस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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