दिल्ली

CBSE ने बदला नियम: अब रट्टा नहीं मारेंगे छात्र, 6वीं से 8वीं तक ‘स्किल एजुकेशन’ हुआ अनिवार्य

किताबी ज्ञान के साथ सीखेंगे असल जिंदगी के हुनर, जानिए क्या है नया प्रोजेक्ट मॉड्यूल, टाइम-टेबल और मार्किंग सिस्टम।

नई दिल्ली
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने स्कूली शिक्षा के ढांचे में एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। बोर्ड ने अपने सभी एफिलिएटेड स्कूलों में कक्षा 6वीं से 8वीं तक के छात्रों के लिए ‘स्किल एजुकेशन’ (Skill Education) को एक अनिवार्य विषय बना दिया है।

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इस फैसले का मकसद छात्रों को सिर्फ किताबों, नोटबुक और परीक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें असल जिंदगी (Real Life) के लिए तैयार करना है। अब स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल करेंगे। अब रट्टा नहीं मारेंगे छात्र, 6वीं से 8वीं तक ‘स्किल एजुकेशन’ हुआ अनिवार्य

सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी पढ़ाई
सीबीएसई के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, स्किल-बेस्ड एजुकेशन अब केवल एक विकल्प (Optional) नहीं, बल्कि मेनस्ट्रीम एजुकेशन का हिस्सा होगा। अब रट्टा नहीं मारेंगे छात्र, 6वीं से 8वीं तक ‘स्किल एजुकेशन’ हुआ अनिवार्य

  • बोर्ड ने इस सत्र के लिए ‘स्किल बोध सीरीज’ की किताबों को लागू करना अनिवार्य कर दिया है।

  • ये किताबें प्रिंट और डिजिटल दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध होंगी।

  • इसमें छात्रों को पौधों और जानवरों की देखभाल, बेसिक मैकेनिकल स्किल्स और ह्यूमन सर्विस जैसे व्यावहारिक काम सिखाए जाएंगे।

साल में पूरे करने होंगे 3 प्रोजेक्ट
नई व्यवस्था के तहत छात्रों को रटने के बजाय ‘करके सीखने’ (Learning by doing) पर जोर देना होगा।

  • प्रोजेक्ट्स: छात्रों को कक्षा 6, 7 और 8 (तीन सालों) में कुल 9 प्रोजेक्ट पूरे करने होंगे यानी हर साल 3 प्रोजेक्ट।

  • विषय: इन प्रोजेक्ट्स में जीवों के साथ काम, मशीनों/मटीरियल से जुड़े काम और अन्य सर्विस आधारित कार्य शामिल होंगे।

  • चयन: किताब में दिए गए 6 प्रोजेक्ट्स में से स्कूल अपनी स्थानीय जरूरतों और संसाधनों के आधार पर छात्रों के लिए 3 प्रोजेक्ट चुन सकेंगे।

बदलेगा स्कूलों का टाइम-टेबल
इस नए पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए स्कूलों को अपने टाइम-टेबल में बदलाव करना होगा।

  • हर साल 110 घंटे (160 पीरियड) सिर्फ स्किल एजुकेशन के लिए निर्धारित होंगे।

  • हफ्ते में कम से कम लगातार दो पीरियड इस विषय के लिए रखने होंगे।

  • तीन सालों में छात्रों को लगभग 270 घंटे का प्रैक्टिकल काम करना होगा।

परीक्षा का पैटर्न भी बदला, ऐसे मिलेंगे नंबर
स्किल एजुकेशन के लिए मूल्यांकन (Evaluation) का तरीका पारंपरिक लिखित परीक्षा से बिल्कुल अलग होगा। इसमें लिखित परीक्षा का वेटेज बहुत कम रखा गया है। मार्किंग स्कीम इस प्रकार होगी:

  • लिखित परीक्षा (Written Exam): 10%

  • वाइवा या प्रेजेंटेशन: 30%

  • एक्टिविटी बुक: 30%

  • पोर्टफोलियो: 10%

  • टीचर ऑब्जर्वेशन: 20%

टीचर्स की होगी ट्रेनिंग और लगेगा ‘स्किल मेला’
इस पहल को सफल बनाने के लिए सीबीएसई और एनसीईआरटी (NCERT) मिलकर शिक्षकों को बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग देंगे।

  • स्किल फेयर (Skills Fair): शैक्षणिक सत्र (Academic Year) के अंत में स्कूलों में एक ‘स्किल फेयर’ आयोजित किया जाएगा।

  • यह एक सालाना इवेंट होगा जहां छात्र अपने प्रोजेक्ट्स, मॉडल्स और अनुभव साझा करेंगे।

  • पेरेंट्स भी इस मेले में आकर देख सकेंगे कि किताबी ज्ञान के अलावा उनके बच्चे दुनिया के बारे में क्या नया सीख रहे हैं।

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