
रायपुर/अभनपुर: CG Cyber Fraud: ऑनलाइन निवेश के जाल में फंसे PWD उपअभियंता, 9.75 लाख रुपये की ठगी; नकली एडवाइजर ने ऐसे बनाया शिकार. छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधी अब पढ़े-लिखे और सरकारी अधिकारियों को अपना निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला अभनपुर क्षेत्र का है, जहां लोक निर्माण विभाग (PWD) में पदस्थ एक उपअभियंता (Sub-Engineer) ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो गए। ठगों ने खुद को इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बताकर उनसे 9.75 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर गोबरा नवापारा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे बिछाया जाल? (Modus Operandi)
गोबरा नवापारा निवासी पीड़ित उपअभियंता कृष्ण कुमार जगने ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को सेबी (SEBI) से सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बताया।
भरोसा जीतना: ठग ने बातचीत में अधिकारी को यह विश्वास दिलाया कि वह शेयर बाजार और निवेश का विशेषज्ञ है। उसने शुरुआत में छोटी रकम निवेश करने का प्रस्ताव दिया और कथित तौर पर अच्छा मुनाफा दिलाने की बात कही।
पैसों का ट्रांसफर: मुनाफा कमाने के लालच और ठग की बातों में आकर उपअभियंता ने विश्वास कर लिया। इसके बाद, ठग ने अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई (UPI) आईडी के माध्यम से कुल 9 लाख 75 हजार रुपये जमा करवा लिए।
शक हुआ तो खुला राज
लगातार पैसे जमा करने के बाद जब उपअभियंता को संदेह हुआ, तो उन्होंने खुद जांच करने का फैसला किया। उन्होंने सेबी (SEBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उस कथित एडवाइजर की जानकारी चेक की। जांच में पता चला कि वह व्यक्ति सेबी में रजिस्टर्ड ही नहीं था। तब उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।CG Cyber Fraud: ऑनलाइन निवेश के जाल में फंसे PWD उपअभियंता
1930 पर दी सूचना, पुलिस जांच में जुटी
ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद गोबरा नवापारा थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और आईटी एक्ट (IT Act) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।CG Cyber Fraud: ऑनलाइन निवेश के जाल में फंसे PWD उपअभियंता
पुलिस और साइबर सेल की टीम अब उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन लिंक की जांच कर रही है, जिनके जरिए पैसे ट्रांसफर किए गए थे।CG Cyber Fraud: ऑनलाइन निवेश के जाल में फंसे PWD उपअभियंता
संगठित गिरोह पर शक
पुलिस का मानना है कि यह किसी बड़े संगठित साइबर गिरोह (Organized Gang) का काम हो सकता है। जांच अधिकारियों का कहना है कि ठग अब केवल आम लोगों को ही नहीं, बल्कि तकनीक की समझ रखने वाले नौकरीपेशा और शिक्षित वर्ग को भी ‘हाई रिटर्न’ (ज्यादा मुनाफे) का लालच देकर फंसा रहे हैं। पुलिस जल्द ही बैंक डिटेल्स और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।CG Cyber Fraud: ऑनलाइन निवेश के जाल में फंसे PWD उपअभियंता
सावधानी: किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें। सेबी रजिस्टर्ड एडवाइजर की जांच हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से करें और वित्तीय लेनदेन से पहले सतर्क रहें।









