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CG PWD News: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहीं सड़कें! अफसरों के पास जांच की फुर्सत नहीं, 24 घंटे में उखड़ रहा करोड़ों का डामर

CG PWD News: छत्तीसगढ़ में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली और सड़कों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य में ‘अव्यवस्थित व्यवस्था’ और अधिकारियों की ‘सुस्ती’ के चलते सड़कों की गुणवत्ता जांच (Quality Check) पिछले एक साल से लगभग ठप पड़ी है। आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बनने वाली नई सड़कें 24 घंटे भी नहीं टिक पा रही हैं।

नए नियमों ने बिगाड़ा खेल: जांच के नाम पर खानापूर्ति

 CG PWD News: सड़कों की बदहाली की सबसे बड़ी वजह विभाग द्वारा गुणवत्ता जांच के नियमों में किया गया बदलाव माना जा रहा है।

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  • क्या है नया नियम? पहले सड़कों की जांच डिवीजन स्तर और थर्ड पार्टी एजेंसियों द्वारा की जाती थी। अब हर जोन में एक जांच टीम बनाई गई है, जिसमें प्रमुख अभियंता (ENC) और मुख्य अभियंता (CE) जैसे बड़े अधिकारी शामिल हैं।

  • दिक्कत कहाँ है? नए प्रावधान के मुताबिक, एक जोन के अधिकारियों को दूसरे जोन की सड़कों की जांच करनी है। लेकिन अपने ही जोन के काम के दबाव का हवाला देकर अफसर दूसरे जोन में निरीक्षण के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे हैं।

शर्मनाक: बनने के अगले ही दिन उखड़ गईं करोड़ों की सड़कें

 CG PWD News: सड़कों के निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार के कुछ चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं:

  1. अंबिकापुर (NH-43): करीब 6 करोड़ की लागत से 600 मीटर सड़क की मरम्मत हुई, लेकिन घटिया निर्माण के कारण वह अगले ही दिन उखड़ गई। इस मामले में सब-इंजीनियर को सस्पेंड किया गया है।

  2. रायपुर (मोवा ओवरब्रिज): 82 लाख रुपये खर्च कर 5 दिनों तक मरम्मत का काम चला, मगर 24 घंटे के भीतर ही सड़क की हालत पहले जैसी हो गई। यहाँ ईई (EE) और एसडीओ (SDO) सहित 3 इंजीनियरों पर गाज गिरी है।

  3. बीजापुर: यहाँ तो 52 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़क के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है।

छत्तीसगढ़ में सड़कों का संजाल: एक नज़र में (आंकड़े किलोमीटर में)

 CG PWD News: राज्य में सड़कों की स्थिति और लंबाई कुछ इस प्रकार है:

  • कुल पीवीडब्ल्यूडी सड़कें: 33.45 हजार किमी

  • मुख्य जिला एवं ग्रामीण मार्ग: 15,443 किमी

  • मुख्य सड़कें (मरम्मत योग्य): 10,539 किमी

  • स्टेट हाईवे: 5,240 किमी

  • नेशनल हाईवे (राज्य का हिस्सा): 2,226 किमी

धूल फांक रही हैं करोड़ों की मशीनें: बंद पड़ी हैं प्रयोगशालाएं

 CG PWD News: हैरानी की बात यह है कि रायपुर स्थित विभाग की केंद्रीय प्रयोगशाला (Central Lab) पिछले एक साल से बंद पड़ी है। जब लैब ही बंद होगी, तो सीमेंट, रेत, गिट्टी और बिटुमिन (डामर) की गुणवत्ता का पता कैसे चलेगा? निगरानी के अभाव में ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं और जनता के टैक्स का पैसा गड्ढों में जा रहा है।

जिम्मेदारों का अजीबोगरीब तर्क: “सब ठीक है”

जहाँ एक तरफ सड़कें उखड़ रही हैं और अधिकारी सस्पेंड हो रहे हैं, वहीं विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता बहुत अच्छी है और किसी विशेष जांच की आवश्यकता नहीं है। यह विरोधाभासी बयान विभाग की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

 CG PWD News: अगर सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग और थर्ड पार्टी ऑडिट फिर से शुरू नहीं किया गया, तो राज्य का बुनियादी ढांचा इसी तरह कागजों पर बनता और जमीन पर उखड़ता रहेगा।

Pooja Chandrakar

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