
CG RTI Action : जन सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत बोईरलामी वृंदावन विश्वकर्मा पर लगा 25000/- रूपये जुर्माना एवं पद से किया गया निलंबित
CG RTI Action : सूचना आयोग ने दिए कड़े निर्देश कहा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (केंद्रीय अधिनियम) की अवहेलना सभी कतई बर्दास्त नहीं की जाएगी
CG RTI Action : जन सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत बोईरलामी जनपद पंचायत पिथौरा जिला महासमुंद के सचिव वृंदावन विश्वकर्मा के ऊपर राज्य सूचना आयोग ने ₹25000 का जुर्माना लगाया है एवं उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन में स्थिरता बरसने के लिए उन्हें पद से निलंबित किया गया हैं।

CG RTI Action : मामला दरअसल यह कि डॉ ताराचंद चंद्राकर, प्रधान संपादक निडर छत्तीसगढ़ (राष्ट्रीय हिन्दी न्यूज़ पेपर एवम ग्लोबल चैनल) ने ग्राम पंचायत बोईरलामी में दिनांक 20/10/2021 को रजिस्टर्ड डॉक के माध्यम से सूचना के अधिकार का एक आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे जन सूचना अधिकारी में लेने से इंकार कर दिया था इस प्रकार आवेदक को सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत जानकारी देने से वंचित किया गया था ।

जिस पर आवेदक में राज्य सूचना आयोग छत्तीसगढ़ के समक्ष अपना शिकायत आवेदन दिनांक 28/12/2021 को प्रस्तुत किया। उक्त शिकायत प्रकरण क्रमांक – 83494/वा.03/प्र.क्र.C/117/2022/दुर्ग की सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयोग छत्तीसगढ़ ने दिनांक 14/10/2022 को 12 बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रखी गई थी जिसमें जन सूचना अधिकारी अनुपस्थित रहे।

इसके पश्चात पुनः दिनांक 16/01/2023 को 12 बजे, राज्य सूचना आयोग ने उक्त शिकायत प्रकरण की सुनवाई रखी गई जिसमें जनसूचना अधिकारी एवम सचिव वृंदावन विश्वकर्मा अनुपस्थित रहे । इस प्रकार जनसूचना अधिकारी एवम सचिव वृंदावन विश्वकर्मा के बार बार अनुपस्थित रहने, आयोग के नोटिस का कोई जवाब नहीं देने एवं सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 का उल्लंघन करने पर राज्य सूचना आयोग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पिथौरा जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ को निर्देशित किया है कि जनसूचना अधिकारी के ऊपर ₹25000 का जुर्माना लगाए एवं उनके द्वारा कर्तव्यों के निर्वहन में शिथिलता एवम घोर लापरवाही बरतने के लिए उनके ऊपर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के सख्त निर्देश दिए हैं जिसके अनुसार इस आदेश को 30 दिवस की अंदर पूरा कर राज्य सूचना आयोग को तामिल कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है।

अधिकांश पंचायतों में खुलेआम संसद द्वारा पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए कानून सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (केन्द्रीय अधीनियम) का उल्लंघन हो रहा है। प्रथम अपीलीय अधिकारीयो के द्वारा जनसूचना अधिकारीयो के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं करने से जन सूचना अधिकारी के हौसले बहुत बुलंद हो जाते हैं जिससे वे खुलेआम भ्रष्टाचार में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं आवेदक के आवेदन पर राज्य सुचना आयोग में सुनवाई एवम कार्रवाई होते तक जन सूचना अधिकारी अपना ट्रांसफर करा लेते हैं जिसकी चलते हे कार्रवाई से बचते नजर आते हैं। और वहां ले फिर से भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए सुनिश्चित योजना बनाते रहते हैं।
जब तक ऐसे भ्रष्टाचारियों के ऊपर इस तरह का जुर्माना नहीं लगेगा एवं उनके ऊपर अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं होगी तब तक ये होकर भ्रष्टाचार को यूं ही सालों साल अंजाम देते रहेंगे।



















