विवाह कानून में बदलाव: 9 साल की बच्चियों से विवाह की अनुमति पर विश्व स्तर पर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: इराक में प्रस्तावित विवाह संशोधन कानून पर चर्चा ने दुनियाभर में महिला अधिकारों और सुरक्षा पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। इस संशोधन के तहत 9 साल की लड़कियों से विवाह को वैध बनाने की तैयारी है, जिससे महिलाओं के अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ गया है। इस कानून के अनुसार, पुरुष 9 साल की बच्चियों से विवाह कर सकेंगे, और इसके अलावा महिलाओं को तलाक, बच्चों की देखरेख और संपत्ति पर अधिकारों से भी वंचित किया जा सकता है। विवाह कानून में बदलाव: 9 साल की बच्चियों से विवाह की अनुमति पर विश्व स्तर पर बढ़ी चिंता
महिला अधिकारों पर गंभीर प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, इस विधेयक में प्रस्तावित बदलाव महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। इस नए कानून में इराकी नागरिकों को पारिवारिक मामलों पर धार्मिक अधिकारी या नागरिक न्यायपालिका का चयन करने का विकल्प दिया जाएगा, जो उन्हें धार्मिक नियमों के सख्त नियंत्रण में ला सकता है। विवाह कानून में बदलाव: 9 साल की बच्चियों से विवाह की अनुमति पर विश्व स्तर पर बढ़ी चिंता
बाल विवाह की बढ़ती दरें
यूनीसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, इराक में बाल विवाह की दर पहले से ही उच्च है, और इस कानून के पास होने से यह दर और बढ़ सकती है। इराक में लगभग 28% लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले ही कर दी जाती है। नए संशोधन से इन नाबालिग लड़कियों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों का संकट गहरा सकता है, जोकि उनके विकास और भविष्य पर गंभीर असर डालेगा। विवाह कानून में बदलाव: 9 साल की बच्चियों से विवाह की अनुमति पर विश्व स्तर पर बढ़ी चिंता
महिला संगठनों और मानवाधिकार संस्थाओं का विरोध
इसी बीच, महिला अधिकार संगठनों और ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस कानून का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह कानून महिलाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। कम उम्र में विवाह न केवल यौन और शारीरिक हिंसा का खतरा बढ़ाएगा बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव को भी बढ़ावा देगा। विवाह कानून में बदलाव: 9 साल की बच्चियों से विवाह की अनुमति पर विश्व स्तर पर बढ़ी चिंता
इराकी सरकार का रुख
इराकी सरकार, जिसमें शिया पार्टियों का बहुमत है, इस कानून को पारित कराने के लिए जोर दे रही है। उनका दावा है कि यह कानून इस्लामी शरिया की सख्त व्याख्या के अनुरूप है और इससे युवा लड़कियों को तथाकथित “अनैतिक संबंधों” से बचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, महिला संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस कानून के पारित होने से लड़कियों के अधिकारों और स्वतंत्रता पर गहरा असर पड़ सकता है। विवाह कानून में बदलाव: 9 साल की बच्चियों से विवाह की अनुमति पर विश्व स्तर पर बढ़ी चिंता



















