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मध्यप्रदेश

Chhatarpur Superstition News: छतरपुर में अंधविश्वास का ‘खूनी’ साया! एक साल में 150 लोगों की मौत, अस्पताल के बजाय झाड़फूंक पर भरोसा पड़ रहा भारी

Chhatarpur Superstition News: आधुनिक युग और विज्ञान की प्रगति के बावजूद मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला आज भी अंधविश्वास की जंजीरों में जकड़ा हुआ है। साल 2025 में अब तक करीब 150 लोगों को अपनी जान सिर्फ इसलिए गंवानी पड़ी क्योंकि उनके परिजनों ने डॉक्टर से पहले ओझा और तांत्रिकों पर भरोसा किया। सर्पदंश (Snakebite) और गंभीर बीमारियों के मामलों में सही समय पर इलाज न मिलना इन मौतों की मुख्य वजह बनकर उभरा है।

Chhatarpur Superstition: झाड़फूंक के फेर में उजड़ रहे परिवार: आंकड़े डराने वाले हैं

Chhatarpur Superstition News: छतरपुर जिले के सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो जुलाई से दिसंबर के बीच ही 69 लोगों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में हर महीने औसतन 10 ऐसे केस आ रहे हैं, जिन्हें सांप के काटने के बाद पहले झाड़फूंक के लिए ले जाया गया और जब हालत बिगड़ गई, तब अस्पताल लाया गया।

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Chhatarpur Superstition News: जुलाई और अक्टूबर के बीच सर्पदंश की 400 से अधिक घटनाएं दर्ज हुईं। वहीं, नवंबर और दिसंबर में आए 20 मामलों में से 6 लोगों की मौत हो गई। इन सभी मामलों में एक बात सामान्य थी— इलाज में देरी।

मानसिक बीमारी या प्रेतबाधा? भ्रम में जा रही जान

Chhatarpur Superstition News: अंधविश्वास का आलम यह है कि लोग मानसिक रोगों को ‘ऊपरी हवा’ या प्रेतबाधा समझ रहे हैं। हाल ही में जिला अस्पताल के वार्ड के अंदर ही एक युवक के परिजन झाड़फूंक करते पाए गए।

Chhatarpur Superstition News: एक अन्य चौंकाने वाले मामले में, हरपालपुर की एक महिला ने खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। परिवार उसे 10 दिनों तक ओझाओं के पास घुमाता रहा, जबकि वह गंभीर मानसिक रोग से जूझ रही थी। समय पर सही इलाज न मिलने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

दर्दनाक दास्तां: जब अंधविश्वास ने छीनीं खुशियां

Chhatarpur Superstition News: जिले से सामने आए कुछ मामले रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं:

  • केस 1: डारगुवां निवासी 17 वर्षीय किशोर कमल को छत पर सोते समय सांप ने काट लिया। परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय ओझा के पास ले गए। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो चुकी थी।

  • केस 2: अमानगंज की नीलम यादव की मौत भी सर्पदंश के बाद समय पर इलाज न मिलने और झाड़फूंक के चक्कर में हुई।

  • केस 3: टिकरी गांव की 65 वर्षीय खुदिया अहिरवार को सांप ने काटा, तो बेटे उन्हें मंदिर ले गए। पुजारी ने 6 घंटे तक झाड़फूंक की, जिससे जहर पूरे शरीर में फैल गया और उनकी मौत हो गई।

  • केस 4: राजनगर की सुमित्रा पटेल की किस्मत अच्छी थी कि ‘रसेल वाइपर’ जैसे जहरीले सांप के काटने के बाद, झाड़फूंक से हालत बिगड़ने पर भी डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत कर उनकी जान बचा ली।

एक्सपर्ट की राय: “अंधविश्वास छोड़ें, अस्पताल आएं”

Chhatarpur Superstition News: जिला अस्पताल के डॉ. नीरज सोनी बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास की जड़ें बहुत गहरी हैं। लोग सांप के काटने या मानसिक दौरे पड़ने पर ओझाओं के पास जाते हैं, जिससे ‘गोल्डन ऑवर’ (इलाज का सबसे महत्वपूर्ण समय) बर्बाद हो जाता है। उन्होंने अपील की है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में झाड़फूंक के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।

जागरूकता ही एकमात्र बचाव

Chhatarpur Superstition News: छतरपुर की ये घटनाएं समाज के लिए एक चेतावनी हैं। शिक्षा और जागरूकता के अभाव में लोग अपने अपनों को खो रहे हैं। याद रखें, सांप के जहर का काट केवल एंटी-वेनम (Anti-Venom) इंजेक्शन है, न कि कोई मंत्र या झाड़फूंक।

Dr. Tarachand Chandrakar

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