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रायपुर

छत्तीसगढ़ निकाय कर्मचारी आंदोलन: छत्तीसगढ़ में निकाय कर्मचारियों का हल्ला बोल: 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आज से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू

छत्तीसगढ़ निकाय कर्मचारी आंदोलन: छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में आज से काम-काज ठप होने की स्थिति बन सकती है। अपनी 10 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर प्रदेश भर के निकाय अधिकारी और कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। महासंघ ने शासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप धारण कर लेगा।

उपमुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ निकाय कर्मचारी आंदोलन:नगरीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने अपनी जायज मांगों को लेकर उपमुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री और विभागीय सचिव को औपचारिक मांग पत्र सौंप दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इसी के विरोध में अब चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता चुना गया है।

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तीन चरणों में होगी आर-पार की लड़ाई

छत्तीसगढ़ निकाय कर्मचारी आंदोलन: महासंघ की राज्य कार्यसमिति ने निर्णय लिया है कि यह आंदोलन तीन अलग-अलग चरणों में चलाया जाएगा। आंदोलन की रूपरेखा शासन-प्रशासन को पहले ही भेजी जा चुकी है। कर्मचारियों का तर्क है कि मांगों के लंबित होने के कारण न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि कार्यस्थल पर भी भारी असंतोष व्याप्त है, जिससे सीधे तौर पर जनता के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

आज गेट मीटिंग और नारेबाजी से होगा शंखनाद

छत्तीसगढ़ निकाय कर्मचारी आंदोलन:आंदोलन के पहले चरण के तहत, आज यानी 9 जनवरी को प्रदेश की सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्यालयों पर कर्मचारी जुटेंगे। सुबह 10 बजे से गेट मीटिंग शुरू होगी, जहाँ एक घंटे तक जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन के अंत में, संबंधित आयुक्त या मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।

क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य चिंताएं?

छत्तीसगढ़ निकाय कर्मचारी आंदोलन:निकाय कर्मियों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से पदोन्नति, नियमितीकरण और अन्य भत्तों जैसी बुनियादी मांगें अटकी हुई हैं। शासन के ढुलमुल रवैये से नाराज कर्मचारियों ने अब मन बना लिया है कि जब तक उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।

Dr. Tarachand Chandrakar

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