छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: फूड प्रोसेसिंग यूनिट को पांच करोड़ तक मंडी शुल्क में छूट, स्थानीय लोगों को नौकरी देना होगा अनिवार्य
राज्य सरकार ने संशोधित किए नियम — 100% अकुशल, 70% कुशल और 40% प्रबंधकीय पद स्थानीयों के लिए आरक्षित, एससी-एसटी और महिला उद्यमियों को अतिरिक्त लाभ

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: फूड प्रोसेसिंग यूनिट को पांच करोड़ तक मंडी शुल्क में छूट, स्थानीय लोगों को नौकरी देना होगा अनिवार्य, छत्तीसगढ़ सरकार ने फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी नई और विस्तारित इकाइयों को मंडी शुल्क में पांच करोड़ रुपए तक की छूट मिलेगी। हालांकि यह छूट केवल उन उद्योगों को दी जाएगी, जो स्थानीय निवासियों को रोजगार देने की शर्त पूरी करेंगे।
राज्य सरकार के कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग ने इसके लिए “कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012” के अंतर्गत बने मंडी शुल्क में छूट नियम 2014 में संशोधन किया है। नए नियम के अनुसार, पात्र इकाइयों को यह छूट तभी मिलेगी जब वे राज्य के मूल निवासियों को कम से कम पांच वर्षों तक स्थायी नियोजन में रखेंगे फूड प्रोसेसिंग यूनिट को पांच करोड़ तक मंडी शुल्क में छूट, स्थानीय लोगों को नौकरी देना होगा अनिवार्य
🔹 स्थानीय लोगों को रोजगार अनिवार्य
संशोधित प्रावधानों के अनुसार—
अकुशल कर्मचारियों/श्रमिकों के मामलों में 100 प्रतिशत,
कुशल कर्मचारियों के मामलों में न्यूनतम 70 प्रतिशत,
प्रशासकीय या प्रबंधकीय पदों में न्यूनतम 40 प्रतिशत रोजगार राज्य के स्थानीय लोगों को देना होगा।
इन शर्तों के पालन पर ही उद्योगों को मंडी शुल्क में छूट का लाभ मिलेगा।
🔹 पांच करोड़ तक की वार्षिक छूट
पात्र उद्योगों को छूट प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख से अगले पांच वर्ष तक कृषि उत्पादों पर लगने वाले मंडी शुल्क से पूर्ण छूट दी जाएगी। यह छूट अधिकतम 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की सीमा तक होगी। हालांकि कुल छूट की राशि उद्योग द्वारा किए गए स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी फूड प्रोसेसिंग यूनिट को पांच करोड़ तक मंडी शुल्क में छूट, स्थानीय लोगों को नौकरी देना होगा अनिवार्य
🔹 विशेष वर्गों को अतिरिक्त लाभ
राज्य सरकार ने विशेष श्रेणियों के उद्यमियों के लिए छूट की अवधि एक वर्ष और बढ़ाकर छह वर्ष कर दी है। इनमें शामिल हैं —
अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के उद्यमी,
महिला उद्यमी,
भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक,
नक्सल प्रभावित परिवार,
दिव्यांगजन,
अप्रवासी भारतीय (NRI) निवेशक,
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने वाले उद्यमी और
विदेशी तकनीक आधारित उद्योग।
इन वर्गों के उद्योगों को कृषि उत्पादों पर लगने वाले मंडी शुल्क से 5.50 करोड़ रुपए तक की वार्षिक छूट मिलेगी, जो कुल निवेश के 75% से अधिक नहीं होगी। फूड प्रोसेसिंग यूनिट को पांच करोड़ तक मंडी शुल्क में छूट, स्थानीय लोगों को नौकरी देना होगा अनिवार्य
🔹 विद्यमान उद्योगों के विस्तार पर भी लागू
यह नियम उन उद्योगों पर भी लागू होगा जिन्होंने 1 नवंबर 2019 से पहले वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया था और अब अपनी इकाई में 25 प्रतिशत से अधिक निवेश कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। ऐसे उद्योगों को विस्तार से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
🔹 निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति छत्तीसगढ़ में स्थानीय रोजगार सृजन के साथ-साथ औद्योगिक निवेश को भी प्रोत्साहन देगी। इससे फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में नए उद्योगों की स्थापना की संभावना बढ़ेगी और किसानों के कृषि उत्पादों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की सुविधा मिलेगी।
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