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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मंत्री कवासी लखमा को मिलेगी बेल या रहेंगे जेल? हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मंत्री कवासी लखमा को मिलेगी बेल या रहेंगे जेल? हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में फंसे पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता कवासी लखमा की जमानत याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

जमानत पर सस्पेंस, फैसला सुरक्षित

जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में कवासी लखमा की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हुई। इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। लखमा के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि मामले में गिरफ्तारी काफी देर से की गई, जो सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी से पहले लखमा का पक्ष ठीक से नहीं सुना गया।पूर्व मंत्री कवासी लखमा को मिलेगी बेल या रहेंगे जेल?

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क्या है 64 करोड़ रुपए का पूरा मामला?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि कवासी लखमा के आबकारी मंत्री रहते हुए उनके संरक्षण में यह पूरा घोटाला अंजाम दिया गया। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस घोटाले से मिली अवैध कमाई में से 64 करोड़ रुपए की रकम सीधे कवासी लखमा तक पहुंची, जिसे उन्होंने अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों के लिए इस्तेमाल किया। इस मामले में अब तक चार आरोप पत्र (चार्जशीट) कोर्ट में दाखिल किए जा चुके हैं।पूर्व मंत्री कवासी लखमा को मिलेगी बेल या रहेंगे जेल?

कैसे खुला था 2161 करोड़ का यह घोटाला?

इस बड़े घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब आयकर विभाग ने 11 मई, 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर रिश्वत और अवैध दलाली का खुलासा किया गया था। याचिका में तत्कालीन रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर को अवैध वसूली का मुख्य सूत्रधार बताया गया था।पूर्व मंत्री कवासी लखमा को मिलेगी बेल या रहेंगे जेल?

आयकर विभाग की इसी याचिका को आधार बनाकर ED ने 18 नवंबर, 2022 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया। अपनी जांच और दस्तावेजों के आधार पर ED ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में इस घोटाले को 2161 करोड़ रुपए का बताया, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।पूर्व मंत्री कवासी लखमा को मिलेगी बेल या रहेंगे जेल?


Dr. Tarachand Chandrakar

Editor-in-Chief

डॉ. ताराचंद चंद्राकर एक प्रखर विचारक और अनुभवी पत्रकार हैं, जो 'निडर छत्तीसगढ़' के माध्यम से निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं। तथ्यों की शुद्धता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें डिजिटल पत्रकारिता में एक विश्वसनीय नाम बनाया है।

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